दशकों से गोलाबारी के बीच पिस रहे एलओसी की शून्य रेखा के बाशिंदों की तकदीर तेजी से बदल रही है। बॉर्डर की शून्य रेखा (एलओसी पर एक किलोमीटर के दायरे का क्षेत्र) पर तारबंदी के पार का इलाका गरीबी रेखा में जकड़ा हुआ है, लेकिन फरवरी 2021 में संघर्ष विराम के बाद शून्य रेखा के इस इलाके में गरीबी रेखा मिटती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबी से त्रस्त 200 कुनबों के लिए पक्के घर मंजूर हुए हैं। 150 बनकर तैयार भी हो गए हैं।
LoC Ground Report: भारत-पाकिस्तान की शून्य रेखा पर मिटने लगी गरीबी रेखा, अब इलाके में बनने लगे पक्के मकान
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प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों मोहम्मद शबीर, खातून बी, जाहिरा बेगम, लाल दीन से बात की गई तो वे खुशी से फूले नहीं समाए। उन्होंने बताया कि पहली बार प्रधानमंत्री आवास में नियंत्रण रेखा के इतने करीब हमें पक्के घर बनाने के लिए सरकारी सहायता मिली है। यह सपना सच होने जैसा है। सरकार की पहल से न सिर्फ पाकिस्तानी गोलाबारी बंद हुई है बल्कि यहां के बाशिंदों को पक्के आशियाने बनाने के लिए मदद भी मिल रही है।
इक्का दुक्का को मिलती थी मदद, गोलाबारी में नहीं बन पाते थे घर
सरपंच मोहम्मद अकबर और पंच मोहम्मद सदीक ने बताया कि फेंसिंग से आगे स्थित इस पंचायत में पहली बार प्रधानमंत्री आवास योजना में 200 के करीब घर मिले हैं। इनमें से 150 घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। अगले एक दो माह में बाकी घरों का निर्माण पूरा हो जाएगा।इससे पूर्व नियंत्रण रेखा की पंचायत में एक या दो लोगों को ही इस योजना में घर मिलते थे। वो पाकिस्तानी गोलाबारी के कारण पूरे नहीं बन पाते थे। यह पहली बार हुआ है कि हमारी पंचायत को 200 घर मिले हैं और कई घर ऐसे स्थानों पर बने हैं, जहां से पाकिस्तानी की चौकियों की दूरी मात्र पचास मीटर है।
ब्लॉक के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना में 2995 लोगों के लिए पक्के घर बनाने की मंजूरी मिली थी। इसमें से 2750 घरों का निर्माण कराया जा रहा है। नियंत्रण रेखा पर फेंसिंग से आगे स्थित पंचायत दरा बगयाल में सबसे अधिक 196 घर मंजूर हुए हैं। इनमें से 195 घरों के लिए एक-एक किस्त जारी हो चुकी है। 145 घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। - परवेज शाह, ब्लाक डेवलपमेंट ऑफिसर, पुंछ