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राष्ट्रीय बालिका दिवस: अमर उजाला की पहल कार्यस्थल पर बेटियां, देखें खूबसूरत तस्वीरें
Thu, 24 Jan 2019 02:30 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Thu, 24 Jan 2019 02:30 AM IST
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डॉ कमल शर्मा, पिता
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राष्ट्रीय बालिका दिवस पर बेटियों में आत्मविश्वास जगाकर भावनात्मक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से अमर उजाला ने अनूठी पहल 'कार्यस्थल पर बेटियां' शुरू की है। मुहिम से जुड़ते हुए लोगों ने इसे सराहनीय कदम बताया। साथ ही अपने कार्यस्थल पर बेटियों के साथ सेल्फी लीं और अमर उजाला के साथ शेयर कीं। आप भी जुड़ें और सेल्फी शेयर करें। देखें जम्मू-कश्मीर की तस्वीरें और सेल्फी...
aradhya
उसकी मुस्कान थकान मिटा देती है
"आराध्य की हंसी दिन भर की थकान मिटा देती है। रात को घर आने पर उसका चेहरा देखने भर से दिल को सच्ची खुशी मिलती है। आराध्य पापा से सबसे ज्यादा बातें करनी पसंद करती है।" -चंद्रशेखर, पिता, जम्मू
"आराध्य की हंसी दिन भर की थकान मिटा देती है। रात को घर आने पर उसका चेहरा देखने भर से दिल को सच्ची खुशी मिलती है। आराध्य पापा से सबसे ज्यादा बातें करनी पसंद करती है।" -चंद्रशेखर, पिता, जम्मू
संदीप गुप्ता पिता
...तो दिन गुजर जाता है अच्छा
"बेटियां गर्व करने के लिए होती है। उनकी मुस्कान से हर गम और तकलीफ सहने का हौसला मिलता है। जब कभी अनन्या और अनमोलिका दुकान पर आती है तो पूरा दिन अच्छा निकलता है।"- अनन्या और अनमोलिका के पिता, संदीप गुप्ता, उधमपुर
"बेटियां गर्व करने के लिए होती है। उनकी मुस्कान से हर गम और तकलीफ सहने का हौसला मिलता है। जब कभी अनन्या और अनमोलिका दुकान पर आती है तो पूरा दिन अच्छा निकलता है।"- अनन्या और अनमोलिका के पिता, संदीप गुप्ता, उधमपुर
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मीना कुमारी
बेटियों के प्रति सोच बदलने की जरूरत
"गांवों में अभी भी बेटियों को बोझ समझा जाता है। बेटियों की उम्र बढ़ती है तो उनकी शादी करने का ख्याल पहले आता है। मान्या और मायरा पर गर्व होता है। समाज में बेटे और बेटियों के बीच का भेदभाव समाप्त होना चाहिए। बेटियां अपनी प्रतिभा और मेहनत से अपना मुकाम हासिल करने में सक्षम हैं।" -मान्या और मायरा की मां मीना कुमारी, जम्मू
"गांवों में अभी भी बेटियों को बोझ समझा जाता है। बेटियों की उम्र बढ़ती है तो उनकी शादी करने का ख्याल पहले आता है। मान्या और मायरा पर गर्व होता है। समाज में बेटे और बेटियों के बीच का भेदभाव समाप्त होना चाहिए। बेटियां अपनी प्रतिभा और मेहनत से अपना मुकाम हासिल करने में सक्षम हैं।" -मान्या और मायरा की मां मीना कुमारी, जम्मू
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कुंदन
पिता की दुलारी होती हैं बेटियां
बेटियां पिता की सबसे अधिक दुलारी होती हैं। महक और आरुषि के स्कूल जाने से पूरा घर सूना-सूना लगता है। स्कूल से आने पर घर में दुबारा जोश और उमंग छा जाता है। घर में बेटी का जन्म होना शुभ होता है।- महक और आरुषि के पिता कुंदन, उधमपुर
बेटियां पिता की सबसे अधिक दुलारी होती हैं। महक और आरुषि के स्कूल जाने से पूरा घर सूना-सूना लगता है। स्कूल से आने पर घर में दुबारा जोश और उमंग छा जाता है। घर में बेटी का जन्म होना शुभ होता है।- महक और आरुषि के पिता कुंदन, उधमपुर