महाशिवरात्रि का पर्व इस साल आठ मार्च को मनाया जाना है। इस बार की महाशिवरात्रि बहुत ही खास मानी जा रही है, क्योंकि इस बार महाशिवरात्रि के दिन कई शुभ योग बन रहे हैं। जम्मू कश्मीर के मंदिर में इसकी तैयारियां जोरों पर जारी हैं।
महाशिवरात्रि पर कश्मीर घाटी में खास तैयारियां देखने को मिलती हैं। कश्मीरी पंडितों का यह सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। देश के अन्य हिस्सों की अपेक्षा इसे यहां ज्यादा धूमधाम से मनाया जाता है। कश्मीरी पंडित इसे 'हेरथ' के रूप में मनाते हैं। हेरथ शब्द संस्कृत भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी अर्थ हररात्रि या शिवरात्रि होता है।
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शिवरात्रि पर शंकराचार्य मंदिर में पूजा करते लोग (File)
- फोटो : बासित जरगर
हेरथ को कश्मीरी संस्कृति के आंतरिक और सकारात्मक मूल्यों को संरक्षित रखने का पर्व भी माना जाता है। इसके साथ ही यह लोगों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बता दें कि कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर भगवान शिव सहित उनके परिवार की स्थापना घरों में करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से वटुकनाथ घरों में मेहमान बनकर रहते हैं। करीब एक महीने पहले से इसे मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं।
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Kheer Bhawani Temple (File)
- फोटो : बासित जरगर
इस त्योहार के दिन पूजन में प्रयोग में लाए जाने वाले बर्तनों को प्रतीकों के रूप में प्रयोग किया जाता है। उपलब्धता के अनुरूप कई घरों में पुराने समय के पीतल के बर्तनों को प्रयोग में लाते हैं। इस पूजन व घरों में बनने वाले व्यंजनों में कमल ककड़ी और गांठगोभी काफी प्रमुख होती है। जम्मू-कश्मीर में इसे मोंजी और नदरू के नाम से जाना जाता है।
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Kheer Bhawani Temple (File)
- फोटो : बासित जरगर
तीन दशक से अधिक समय से विस्थापन का दंश झेल रहे कश्मीरी पंडित महाशिवरात्रि पर सभी परंपराएं निभा रहे हैं। देशभर में बसे कश्मीरी पंडितों का कहना है कि अब भी यह परंपरा निभा रहे हैं। यही कश्मीरियत और इंसानियत की खूबसूरती है। शिवरात्रि पर वे भगवान भैरव की भी पूजा करते हैं। भगवान भैरव को मांस और मछली का भोग लगाने की परंपरा है, जिसे वह निभा रहे हैं। रीति के अनुसार शाकाहारी भोग भी लगाए जाते हैं। इसमें पांच-छह प्रकार की सब्जियां होती हैं। रात में पूजा अर्चना करने के बाद प्रसाद ग्रहण किया जाता है।
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Kheer Bhawani Temple (File)
- फोटो : बासित जरगर
जम्मू के शहर रघुनाथ मंदिर, पीर खो गुफा मंदिर, रणबीरेश्वर मंदिर सहित रियासी के शिव खोड़ी मंदिर, चिनैनी के सुध महादेव मंदिर में विशेष तैयारियां की जा रही हैं। श्रीनगर के ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, हनुमान मंदिर और गणपत्यार मंदिर के अलावा अनंतनाग के मार्तंड सूर्य मंदिर, गांदरबल के खीर भवानी मंदिर में खास तौर से सजाया जा रहा है