कश्मीर घाटी के डाउनटाउन निवासी गुलाम नबी डार और उनके बेटे आबिद अहमद डार अपने हुनर के लिए प्रसिद्ध हैं। घाटी में लोग कहते हैं कि 67 वर्षीय गुलाम नबी जिस लकड़ी को हाथ लगा देते हैं वो बोलने लगती है। अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी कर गुलाम नबी उसे नई पहचान देते हैं। हालांकि कारीगरी की उपेक्षा उन्हें कई बार कचोटती है, बावजूद इसके वह अपना काम बड़ी ही लगन से करते हैं। अहम बात ये है कि बेटे के जरिए वो अपने हुनर को वो आगे भी बढ़ा रहे हैं। अमर उजाला से बातचीत में गुलाम नबी के बेटे ने कई महत्वपूर्ण बातें कही। आगे की स्लाइड में देखिए कारीगरी की अद्भुत तस्वीरें और जानिए अहम बातें...
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अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी
- फोटो : बासित जरगर
गुलाम नबी डार ने कहा कि मेरे पिता ने सपना देखा था कि मैं एक अच्छा कारीगर बनूं और इसे अमल में लाऊं। वह चाहते थे कि मैं वास्तविक शिल्प कौशल सीखूं, जो कश्मीर लंबे समय से प्रसिद्ध है। पिता की बातों ने मेरा मनोबल बढ़ाया। जब मैं 14 साल का था, अपने करियर की शुरुआत में दो मास्टर कारीगरों के साथ बैठता था। मैं पूरी तरह से कच्चा था और विपरीत परिस्थितियों के कारण उचित शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाया था। वो दोनों कारीगर जो कुछ भी जानते थे, मुझे सिखाया।
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अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी
- फोटो : बासित जरगर
इसके बाद मैंने अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी की शुरुआत की। हालांकि, जल्द ही मुझे एहसास हुआ कि मुझे अपने व्यक्तिगत प्रयासों से ही सीखना होगा। इस दौरान मैंने कुछ पुराने और अनुभवी कारीगरों के संपर्क में रहना शुरू किया, जो उस समय रेनावारी में रहते थे। गुलाम नबी डार का मानना है कि एक बार जब आप अपना दिल एक शिल्प में लगाते हैं, तो यह आपको पूरे विश्व में अपार सम्मान और पहचान दिलाता है।
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अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी
- फोटो : बासित जरगर
गुलाम नबी डार के बेटे आबिद अहमद डार ने कहा कि मेरे पिता करीब 53 साल से लकड़ी पर नक्काशी का काम कर रहे हैं। ऑर्डर मिलने पर हम लकड़ी के आइटम घाटी के बाहर भी भेजते हैं। अधिक मेहनत और बारीक काम होने की वजह से लागत ज्यादा आती है। इस वजह से तैयार किए गए आइटम महंगे होते हैं।
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अखरोट की लकड़ी पर नक्काशी
- फोटो : बासित जरगर
इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार को घाटी की संस्कृति को बढ़ावा देने वाले कारीगरों की मदद करनी चाहिए। लंबे अर्से से इस काम से जुड़े लोग उपेक्षा का शिकार हैं। उन्हें अच्छा बाजार उपलब्ध कराया जाए। ये लकड़ी पर नक्काशी कश्मीर की संस्कृति को दिखाती है।