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Kargil Vijay Diwas: गोलियों की बौछार में लिखी थी शौर्यगाथा, पढ़ें- रोंगटे खड़े कर देने वाली पराक्रम की कहानी

Tue, 26 Jul 2022 03:23 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, लेह/जम्मू
अमर उजाला ब्यूरो, लेह/जम्मू Published by: अनुराग सक्सेना Updated Tue, 26 Jul 2022 03:23 PM IST
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Kargil Vijay Diwas anniversary story of bravery was written in a barrage of bullets;
कारगिल के द्रास स्थित लामोचन व्यू प्वाइंट पर हुआ कार्यक्रम - फोटो : इंडियन आर्मी

द्रास, कारगिल और बटालिक सेक्टर की चोटियों से गोलाबारी कर रहे दुश्मन से बेपरवाह भारतीय सेना के जांबाज आगे बढ़ रहे हैं। कुछ साथी वीरगति को प्राप्त हो रहे हैं, लेकिन रणबांकुरों में न खौफ है न अपनी जान की परवाह। पथरीले पहाड़ चढ़ने की चुनौती और गोलियों की बौछार के बीच कारगिल युद्ध के मोर्चे फतेह कर योद्धा इस तरह से साहस और पराक्रम की असाधारण नजीर बन गए। सोमवार को कारगिल के द्रास स्थित लामोचन व्यू प्वाइंट पर कारगिल गाथा सुनाए जाने पर उपस्थित हर किसी की आंखों के आगे कारगिल युद्ध के जीवंत दृश्य तैरने लगे।

Kargil Vijay Diwas anniversary story of bravery was written in a barrage of bullets;
कारगिल के द्रास स्थित लामोचन व्यू प्वाइंट पर कार्यक्रम हुआ आयोजित - फोटो : इंडियन आर्मी

उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी की अध्यक्षता में कारगिल युद्ध के शहीदों की याद में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। वीर नारियों, शहीदों के परिजन, वार हीरो समेत अन्य अतिथियों ने लामोचन व्यू प्वाइंट से कारगिल युद्ध की आंखों देखी दास्तान साझा की।

द्रास, कारगिल और बटालिक सेक्टर में दुश्मन के कब्जे में चोटियों को छुड़ाने के लिए कैसे ऑपरेशन विजय को अंजाम दिया गया। दुनिया के सबसे मुश्किल युद्धों में से एक कारगिल युद्ध के मोर्चे कैसे फतेह किए गए। असंभव को संभव कर दिखाने वाले भारतीय जांबाजों की वीरगाथाएं सुन उपस्थिति के जेहन में जून-जुलाई 1999 में घनघोर युद्ध के दृश्य ताजा हो गए। कार्यक्रम में मौजूद 14 वीर नारियों, दो वीर माताओं, 10 वॉर हीरो ने असल जिंदगी से जुड़ी कहानियों ने सभी को भावुक कर दिया।

Kargil Vijay Diwas anniversary story of bravery was written in a barrage of bullets;
कारगिल विजय दिवस - फोटो : सोशल मीडिया

ऐसे खदेड़ा पाकिस्तानी घुसपैठियों को

कारगिल युद्ध दो माह चला था। इसमें भारतीय सेना ने 527 जांबाज खोए। 1,300 से ज्यादा सैनिक जंग में घायल हुए। वहीं, पाकिस्तान को इससे कई गुना अधिक नुकसान उठाना पड़ा था।

कसर संघर्ष

यह वही क्षेत्र है, जहां पहला भारतीय गश्त दल सर्दियों में खाली पड़ी चौकियों पर फिर से कब्जा करने गया था, जहां घुसपैठिए घात लगाए बैठे थे। इस क्षेत्र में भीषण युद्ध हुआ और भारतीय सेना ने पाकिस्तानियों को मार भगाने के लिए कई हमले किए।

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Kargil Vijay Diwas anniversary story of bravery was written in a barrage of bullets;
टाइगर हिल पर विजय पताका - फोटो : अमर उजाला

टाइगर हिल का मोर्चा

टाइगर हिल द्रास (कारगिल) क्षेत्र की सबसे ऊंची चोटियों में से एक थी। कारगिल लड़ाई के दौरान इस अहम क्षेत्र से पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने का काम भारतीय सेना के सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक था। इस चोटी पर चार जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने तिरंगा फहरा दिया था।

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Kargil Vijay Diwas anniversary story of bravery was written in a barrage of bullets;
कारगिल युद्ध - फोटो : सोशल मीडिया

बटालिक में कार्रवाई

इस क्षेत्र में ऑपरेशन विजय की पहली सफलता 9 जून 1999 को रॉकफाल इलाके में हासिल हुई। उसके बाद प्वाइंट 4878, गरही प्वाइंट 5000 और जुबार क्षेत्र पर हमले शुरू किए गए। सेना के वीर सैनिकों ने दुश्मनों से बटालिक क्षेत्र को 7 जुलाई 1999 तक मुक्त करवा लिया।

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