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जम्मू-कश्मीर के द्रास में है एक ऐसा स्कूल जहां दी जाती है कारगिल जैसा युद्ध लड़ने की ट्रेनिंग
Wed, 24 Jul 2019 03:20 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 24 Jul 2019 03:20 PM IST
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कारगिल बैटल स्कूल
- फोटो : ANI
भारतीय सेना के जवानों के साहस और वीरता की गाथाएं तो आप लगातार सुनते रहते होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं उनकी वीरता के पीछे उनकी ट्रेनिंग का अहम योगदान होता है। सैनिक हजारों फीट की ऊंची पहाड़ियों पर भी भारत का झंडा फहरा देते हैं। उनकी यह ट्रेनिंग होती है एक स्कूल में, जहां उन्हें जंग के लिए तैयार किया जाता है। जानते हैं उस स्कूल के बारे में...
कारगिल बैटल स्कूल
- फोटो : ANI
इस स्कूल का नाम है कारगिल बैटल स्कूल, जहां सैनिकों को ट्रेनिंग दी जाती है। खास तौर पर यहां पहाड़ों पर जंग लड़ना सिखाया जाता है। द्रास सेक्टर में स्थित कारगिल बैटल स्कूल कारगिल में जवानों को ऊंची पहाड़ियों पर चढ़ना सिखाया जाता है और इस बैटल स्कूल में जवानों को कई तरह की टेक्निक्स के बारे में बताया जाता है।
कारगिल बैटल स्कूल
- फोटो : ANI
इस स्कूल का निर्माण कारगिल की लड़ाई के एक साल बाद 2000 में किया गया था। स्कूल का मकसद जवानों और सैनिकों को इस तरह से तैयार करना है कि वह ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर तो आसानी से पहुंच ही सकें, साथ ही वहां पर ऑक्सीजन की कमी जैसे मुश्किल हालातों का सामना भी कर सकें।
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कारगिल बैटल स्कूल
- फोटो : ANI
अधिकारियों का कहना है कि उन्हें 10 हजार से 18 हजार फीट तक की पहाड़ियों के लिए ट्रेनिंग देते हैं। यहां पहाड़ों पर ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है। तीन हफ्तों तक यहां ट्रेनिंग दी जाती है और इसमें हर हफ्ते के साथ तैयारी करवाई जाती है।
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कारगिल बैटल स्कूल
- फोटो : ANI
इसमें 90 डिग्री चढ़ाई, रैपेलिंग, एसॉल्ट क्लाइंबिंग रॉक आदि के बारे में बताया जाता है। इसमें वजन के साथ या लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने के लिए भी तैयार किया जाता है। वहीं कुछ सालों में यहां की हालत में भी काफी सुधार हुआ है और सैनिकों के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर में भी बदलाव हुआ है।