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कारगिल युद्ध का एक ऐसा योद्धा जिसने परमवीर चक्र पाने के लिए ज्वाइन की थी सेना, पढ़िए वीर गाथा...

Wed, 24 Jul 2019 01:21 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Wed, 24 Jul 2019 01:21 PM IST
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kargil vijay diwas 20 years: Indian Army, Kargil Vijay Diwas, Kargil War Hero Captain Manoj Pandey
कारगिल युद्ध के दौरान अपने साथियों संग कैप्टन मनोज पांडेय - फोटो : फाइल, अमर उजाला

विजय दिवस यानी 26 जुलाई, 1999 का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में अंकित है। इसी दिन कारगिल चोटी को भारतीय सेना के जांबाजों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़कर मुक्त कराया था। ऑपरेशन विजय की 20वीं वर्षगांठ शुक्रवार को मनाई जाएगी। शहीद जवानों की शहादत को याद किया जाएगा। कारगिल युद्ध में अदम्य शौर्य और साहस का परिचय देने वाले ऐसे ही जांबाज को नमन करती ‘अमर उजाला’ की खास रिपोर्ट...। 

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सेना में ट्रेनिंग के दौरान कैप्टन मनोज पांडेय - फोटो : फाइल, अमर उजाला

सीतापुर के कमलापुर में जन्मे कैप्टन मनोज पांडेय कारगिल युद्ध के मुख्य नायकों में शामिल हैं। उन्हें 4 मई, 1999 को कारगिल में भारतीय चौकियों को घुसपैठियों से खाली कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वह पांच नंबर प्लाटून का नेतृत्व कर रहे थे। कैप्टन पांडेय बटालिक सेक्टर में दुश्मनों पर जीत हासिल करते हुए आगे बढ़ रहे थे। उन्हें खालूबार तक हर पोस्ट को जीतने के ऑर्डर थे। इस दौरान उन्हें भयंकर गोलीबारी का सामना करना पड़ा, पर वह आगे बढ़ते गए। उन्होंने दुश्मनों के चार बंकरों को नेस्तनाबूद कर दिया। इसी दौरान वह दुश्मन की गोली का शिकार हो गए।

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कैप्टन मनोज पांडेय
कैप्टन मनोज पांडेय लखनऊ के एकलौते सैन्य अधिकारी रहे, जिन्हें परमवीर चक्र से नवाजा गया। कैप्टन मनोज उत्तर प्रदेश सैनिक स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी से 1997 में गोरखा राइफल्स में कमीशंड हुए। पिता गोपीचंद पांडेय बताते हैं कि बेटे की शहादत पर कैप्टन मनोज पांडेय चौराहा बनाया गया है। 

 
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कैप्टन मनोज पांडेय - फोटो : फाइल, अमर उजाला

‘हासिल करना है परमवीर चक्र’
सर्विस सेलेक्शन बोर्ड का साक्षात्कार था। कैप्टन मनोज पांडेय से साक्षात्कार कर्ता ने पूछा कि आप फौज क्यों ज्वाइन करना चाहते हैं। इस पर मनोज ने तपाक से जवाब दिया था कि मुझे परमवीर चक्र हासिल करना है और उन्होंने ऐसा कर दिखाया। दुर्भाग्यवश वह इस सर्वोच्च पुरस्कार को खुद ग्रहण नहीं कर सके। इससे पहले ही कारगिल युद्ध में शहीद हो गए।

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कैप्टन मनोज पांडेय के माता-पिता - फोटो : फाइल, अमर उजाला
उन्होंने कहा था, ‘अगर अपनी बहादुरी साबित करने से पहले मेरे सामने मौत भी आ गई तो मैं उसे खत्म कर दूंगा। यह सौगंध है मेरी।’
 
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