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Srinagar News: उधमपुर-बारामुला रेल लिंक पूरा होने के बाद भी रेलवे नेटवर्क अधूरा
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) के पूरा होने से कश्मीर घाटी देश के बाकी हिस्सों से सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ चुकी है, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा आज भी रेलवे से नहीं जुड़ सका है। इसे लेकर उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में नाराजगी हैं। कुपवाड़ा, बांदीपोरा और उड़ी जैसे दूरदराज के इलाकों के बाशिंदों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से इन रणनीतिक क्षेत्रों को तुरंत रेल नेटवर्क से जोड़ने की पुरजोर मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारामुला तक रेल पहुंचने के बावजूद उन्हें इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है। कुपवाड़ा के निवासी ज़हूर हुसैन ने कहा कि अगर उनके इलाके तक रेल आती है तो आम जनता और व्यापारियों को बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ट्रेन पकड़ने के लिए उन्हें पहले सड़क मार्ग से लंबा सफर तय कर बारामुला जाना पड़ता है, या फिर सीधे श्रीनगर का रुख करना पड़ता है। इसमें न केवल भारी किराया खर्च होता है, बल्कि सफर भी बेहद थकाऊ हो जाता है। बशीर अहमद ने कहा कि सीमावर्ती जिलों को रेल से जोड़ने से पूरे इलाके की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले कर्मचारियों, छात्रों और मरीजों का काफी समय बचेगा।
दूसरी तरफ, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उत्तरी कश्मीर से जुड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बेहद सुस्त बनी हुई है। बारामुला से उड़ी तक प्रस्तावित 40 किलोमीटर लंबी रेल लाइन लंबे समय से केवल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के स्तर पर ही अटकी हुई है। रेल मंत्रालय ने इसे सीमावर्ती क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुधारने की पहल बताया था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम शुरू होने को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है। वहीं, 34 किलोमीटर लंबी सोपोर-कुपवाड़ा नई रेल लाइन का सर्वे और डीपीआर बनने के बावजूद इसे व्यावहारिक न मानते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिससे कुपवाड़ा के लोगों में भारी निराशा है।
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रेलवे नेटवर्क का यह अंतर केवल उत्तरी कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीर पंजाल के सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ के लोग भी इसी तरह का इंतजार कर रहे हैं। मंत्रालय ने जम्मू/रियासी-पुंछ 190 किमी लाइन के लिए सर्वे को मंजूरी दी है, लेकिन यह भी अभी डीपीआर की शुरुआती प्रक्रिया में है। इसके अलावा घाटी में काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम रूट के दोहरीकरण की डीपीआर भी नीति आयोग और वित्त मंत्रालय की मंजूरियों के फेर में फंसी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कागजी सर्वे और डीपीआर से आगे बढ़कर जब तक इन प्रोजेक्ट्स पर वास्तविक निर्माण कार्य शुरू नहीं होगा, तब तक सीमावर्ती अवाम का सफर आसान नहीं हो सकेगा।
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श्रीनगर। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) के पूरा होने से कश्मीर घाटी देश के बाकी हिस्सों से सीधे रेल नेटवर्क से जुड़ चुकी है, लेकिन केंद्र शासित प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा आज भी रेलवे से नहीं जुड़ सका है। इसे लेकर उत्तरी कश्मीर के सीमावर्ती क्षेत्रों में नाराजगी हैं। कुपवाड़ा, बांदीपोरा और उड़ी जैसे दूरदराज के इलाकों के बाशिंदों ने केंद्र सरकार और रेल मंत्रालय से इन रणनीतिक क्षेत्रों को तुरंत रेल नेटवर्क से जोड़ने की पुरजोर मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारामुला तक रेल पहुंचने के बावजूद उन्हें इसका सीधा लाभ नहीं मिल पा रहा है। कुपवाड़ा के निवासी ज़हूर हुसैन ने कहा कि अगर उनके इलाके तक रेल आती है तो आम जनता और व्यापारियों को बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में ट्रेन पकड़ने के लिए उन्हें पहले सड़क मार्ग से लंबा सफर तय कर बारामुला जाना पड़ता है, या फिर सीधे श्रीनगर का रुख करना पड़ता है। इसमें न केवल भारी किराया खर्च होता है, बल्कि सफर भी बेहद थकाऊ हो जाता है। बशीर अहमद ने कहा कि सीमावर्ती जिलों को रेल से जोड़ने से पूरे इलाके की कनेक्टिविटी में बड़ा सुधार होगा, जिससे रोजाना यात्रा करने वाले कर्मचारियों, छात्रों और मरीजों का काफी समय बचेगा।
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दूसरी तरफ, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उत्तरी कश्मीर से जुड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बेहद सुस्त बनी हुई है। बारामुला से उड़ी तक प्रस्तावित 40 किलोमीटर लंबी रेल लाइन लंबे समय से केवल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के स्तर पर ही अटकी हुई है। रेल मंत्रालय ने इसे सीमावर्ती क्षेत्र में कनेक्टिविटी सुधारने की पहल बताया था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम शुरू होने को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं हुई है। वहीं, 34 किलोमीटर लंबी सोपोर-कुपवाड़ा नई रेल लाइन का सर्वे और डीपीआर बनने के बावजूद इसे व्यावहारिक न मानते हुए ठंडे बस्ते में डाल दिया गया, जिससे कुपवाड़ा के लोगों में भारी निराशा है।
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रेलवे नेटवर्क का यह अंतर केवल उत्तरी कश्मीर तक सीमित नहीं है, बल्कि पीर पंजाल के सीमावर्ती जिलों राजौरी और पुंछ के लोग भी इसी तरह का इंतजार कर रहे हैं। मंत्रालय ने जम्मू/रियासी-पुंछ 190 किमी लाइन के लिए सर्वे को मंजूरी दी है, लेकिन यह भी अभी डीपीआर की शुरुआती प्रक्रिया में है। इसके अलावा घाटी में काजीगुंड-श्रीनगर-बडगाम रूट के दोहरीकरण की डीपीआर भी नीति आयोग और वित्त मंत्रालय की मंजूरियों के फेर में फंसी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कागजी सर्वे और डीपीआर से आगे बढ़कर जब तक इन प्रोजेक्ट्स पर वास्तविक निर्माण कार्य शुरू नहीं होगा, तब तक सीमावर्ती अवाम का सफर आसान नहीं हो सकेगा।