सफेद गिरी, आकार में बड़ा और हाथ से दबाने पर टूटने वाले अखरोट की भूषण प्रजाति बागवानों तक जल्द पहुंचने जा रही है। शेरे कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी जम्मू ने भूषण प्रजाति के अखरोट पर शोध का कार्य पूरा कर लिया है। अब इसे बागवानों तक पहुंचाने की प्रक्रिया चलाई जाएगी।
अब 'भूषण' बदलेगा बागवानों की किस्मत, हाथ से दबाने पर टूट जाता है ये सफेद गिरी वाला अखरोट
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शोध में पाया गया है कि भूषण प्रजाति के अखरोट की पैदावार अच्छी होगी। यह पौधे चार से पांच साल में तैयार हो जाएंगे। इसमें पुरानी किस्म के अखरोट की अपेक्षा ज्यादा पैदावार होगी। अन्य प्रजातियों में चालीस से पचास किलो प्रति पेड़ की तुलना में 60 से 70 किलो तक पैदावार होगी। यह हाथ के दबाने पर भी टूट जाता है।
अप्रैल माह से अखरोट के पौधे वितरित करने का काम शुरू होगा। स्कास्ट जम्मू के बागवानी विभाग के सौजन्य से पौधे वितरित किए जाएंगे। यहां से किसान पौधे लेकर रोप सकते हैं। खास बात यह भी है कि पौध चार से पांच साल के बाद फल देने लगेंगे।
पुरानी किस्मों के पौधे दस से 15 साल बाद फल देते थे। किसान आय बढ़ाने और बगीचा लगाने के लिए पौधे ले सकते हैं। पांच साल के बाद फसल तैयार होने के बाद देश और विदेशों में इनको बेचा जा सकेगा।
स्कास्ट जम्मू ने अखरोट की नई किस्म भूषण पर शोध किया है। शोध में पाया गया है कि अखरोट की गिरी की गुणवत्ता अच्छी है और यह अखरोट हाथ से दबाने पर टूट जाता है। इसका साइज भी बड़ा है। बाजार में ऐसे अखरोट की मांग रहती है। पांच साल में पौधा फल देने लगेगा। -जेपी शर्मा, शोध निदेशक, स्कास्ट जम्मू