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जीते जी घर की छत बनवाना चाहते थे पाक की गोलाबारी में शहीद हुए नायक कृष्ण लाल, बेटा बोला- लूंगा बदला
Thu, 01 Aug 2019 12:13 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Thu, 01 Aug 2019 12:13 AM IST
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शहीद जवान का बेटा
- फोटो : अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर के पलांवाला सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में शहीद हुए नायक कृष्ण लाल का बुधवार को उनके पैतृक गांव घिगडयाल के श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद का घर भारत-पाक सीमा से कुछ ही फीट की दूरी पर स्थित है। शहीद के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखों में पाकिस्तान के खिलाफ घृणा व गुस्सा स्पष्ट दिखाई दिया। लोग कृष्ण लाल अमर रहे के नारे लगा रहे थे।
बुधवार दोपहर 12.20 बजे शहीद का शव गांव घिगडयाल पहुंचा। घर के बरामदे में बैठी शहीद की मां समीत्री देवी, पत्नी शशी देवी, बेटा समीर, छोटी बहन, रिश्तेदार तथा गांव के लोग सेना की गाड़ी को देख कर चीत्कार कर उठे। शहीद के पार्थिव शरीर को देख मां समीत्री तथा पत्नी शशि देवी बेसुध हो गई। दोनों कभी शव के साथ लिपट कर रो लेतीं तो कभी बेसुध हो जातीं। शहीद का बेटा समीर पिता के चेहरे की तरफ ही चुपचाप देख रहा था। उसकी आंखों से आंसू भी नहीं टपक रहे थे। यह दृश्य देख वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।
बहन से किया था रक्षा बंधन पर आने का वादा
शव को घर में डेढ़ घंटे रखा गया, उसके बाद अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े। शव जब घर से ले जाने के लिए सेना के जवान उठाने लगे तो शहीद की मां, पत्नी तथा बहन शव से लिपट गईं। जोर-जोर से कह रही थी, काका एक बार उठ, तुम मुझे कह कर गए थे कि मैं रक्षा बंधन पर घर आऊंगा। मुझसे तुम झूठ नहीं बोल सकते।
शव को घर में डेढ़ घंटे रखा गया, उसके बाद अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े। शव जब घर से ले जाने के लिए सेना के जवान उठाने लगे तो शहीद की मां, पत्नी तथा बहन शव से लिपट गईं। जोर-जोर से कह रही थी, काका एक बार उठ, तुम मुझे कह कर गए थे कि मैं रक्षा बंधन पर घर आऊंगा। मुझसे तुम झूठ नहीं बोल सकते।
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मां ने माथा चूम कर बेटे को किया विदा
श्मशान घाट पर शहीद की मां ने बेटे के शरीर पर अपना हाथ फेर माथे को चूमा, पत्नी और बेटे ने शहीद कृष्ण लाल के पांव छूकर विदाई दी।
श्मशान घाट पर शहीद की मां ने बेटे के शरीर पर अपना हाथ फेर माथे को चूमा, पत्नी और बेटे ने शहीद कृष्ण लाल के पांव छूकर विदाई दी।
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आठ ग्रेनेडियर के जवानों ने दी सलामी
शहीद की अंतिम यात्रा घर से पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। शव के आगे सेना की असम रेजीमेंट का बैंड था, उसके पीछे सेना की आठ ग्रेनेडियर के जवान चल कर शहीद को सलामी दे रहे थे। शव के पीछे क्षेत्र के लोग शहीद कृष्ण लाल अमर रहे, भारतीय सेना जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।
शहीद की अंतिम यात्रा घर से पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। शव के आगे सेना की असम रेजीमेंट का बैंड था, उसके पीछे सेना की आठ ग्रेनेडियर के जवान चल कर शहीद को सलामी दे रहे थे। शव के पीछे क्षेत्र के लोग शहीद कृष्ण लाल अमर रहे, भारतीय सेना जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।