नवरात्र के पावन पर्व पर माता शेरावाली के मंदिरों में लंबी-लंबी कतारें लगती हैं। माता के दर्शन करने के लिए भक्त माता के विभिन्न दरबारों तक पहुंचने का हर संभव प्रयास करते हैं। अगर माता का वह मंदिर शक्तिपीठ है तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। आज हम आपको माता के एक ऐसे शक्तिपीठ के बारे में बताने जा रहे हैं जहां तक पहुंचने के लिए पाकिस्तान सरकार से इजाजत लेनी पड़ेगी। इसका कारण यह है कि माता के ये शक्तिपीठ बलूचिस्तान में स्थित है।
इस शक्तिपीठ के पास में ही हिंगला नदी प्रवाहित होती है। माता का यह मंदिर हिंगलाज देवी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटकर यहां पर देवी सती का सिर गिरा था। इसलिए यह स्थान चमत्कारी और दिव्य माना जाता है। आगे की स्लाइड में कीजिए माता के दर्शन और जानिए कई महत्वपूर्ण बातें...
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हिंगलाज देवी शक्तिपीठ
- फोटो : सोशल मीडिया
पाकिस्तान में मुसलमान देवी हिंगलाज को नानी का मंदिर और नानी का हज भी कहते हैं। इस स्थान पर आकर हिंदू और मुसलमान का भेदभाव मिट जाता है। दोनों ही धर्मों के लोग भक्ति पूर्वक माता की पूजा करते हैं।
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हिंगलाज मंदिर
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हिंगलाज देवी के विषय में ब्रह्मवैवर्त पुराण में कहा गया है कि जो एक बार माता हिंगलाज के दर्शन कर लेता है उसे पूर्वजन्म के कर्मों का दंड नहीं भुगतना पड़ता है। मान्यता है कि भगवान परशुराम द्वारा क्षत्रियों का अंत किए जाने पर बचे हुए क्षत्रियों ने माता हिंगलाज से प्राण रक्षा की प्रार्थना की थी। माता ने क्षत्रियों को ब्रह्मक्षत्रिय बना दिया इससे परशुराम से इन्हें अभय दान मिल गया।
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हिंगलाज मंदिर
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एक मान्यता यह भी है कि रावण के वध के बाद भगवान राम को ब्रह्म हत्या का पाप लगा। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए भगवान राम ने भी हिंगलाज देवी की यात्रा की थी।
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हिंगलाज मंदिर
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भगवान राम ने यहां पर एक यज्ञ भी किया था। माता हिंगलाज माता वैष्णों की तरह एक गुफा में बैठी हैं।