कश्मीर घाटी में पिछले तीन दिनों से लगातार हुई बारिश से झेलम नदी उफान पर है। इससे मध्य व दक्षिणी कश्मीर में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। प्रशासन ने अलर्ट जारी करते हुए नदी-नालों के किनारे पर रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। बाढ़ की स्थिति को देख प्रशासन ने कश्मीर घाटी के सभी स्कूल और कॉलेजों को एहतियातन एक
झेलम उफान पर, कश्मीर में बाढ़ का खतरा, राज्यपाल ने बुलाई आपात बैठक
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मध्य कश्मीर में झेलम में खतरे का निशान 18 फीट है। यहां जलस्तर 20.93 फीट था। दक्षिणी कश्मीर में खतरे का निशान 21 फीट से दो फीट ऊपर 23 फीट पर झेलम बह रही थी।
झेलम नदी के बिल्कुल किनारे बसे कई इलाकों में घरों तक पानी पहुंच गया है। इन इलाकों में पुलिस और फ्लड कंट्रोल विभाग, एसडीआरएफ की टीम राहत कार्यों में जुट गई हैं। इन
इलाकों से नाव के सहारे फंसे लोगों को निकाला गया। नदी के बांधों को रेत के बैग से प्लग किया गया ताकि पानी बांध को ना तोड़ सके। श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र पांपोर और संगम इलाके में भी बांध में दरार पड़ने से पानी सड़कों पर आ गया जिसे तुरंत मौके पर पहुंची पुलिस टीमों ने प्लग कर दिया। हाइवे पर कुछ जगहों पर पानी भर जाने से ट्रैफिक को नए बाईपास से डायवर्ट किया गया है।
राज्यपाल ने बुलाई आपात बैठक, कंट्रोल रूम खुला
राज्पाल ने भी बाढ़ की स्थिति को देखते हुए अधिकारियों के साथ बैठक कर हालात का जायजा लिया। प्रशासन ने कई राहत केंद्रों और कंट्रोल रूम की स्थापना भी की है। फ्लड कंट्रोल विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टी रद्द कर उन्हें काम पर आने के आदेश दे दिए गए। करीब 17 एसडीआरएफ और 2 एनडीआरएफ की टीमों को तैयार रखा गया है। इसके अलावा सभी सुरक्षा एजेंसियों को भी तैयार रहने को कहा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बुलाया जाए।
2014 जैसे हालात नहीं: मौसम विभाग
मौसम विभाग के मुताबिक हालत 2014 जैसे नहीं है मगर बारिश जरूर ज्यादा हुई है। विभाग के एक अधिकारी के अनुसार जमीन गीली है। लोगों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि भूस्खलन की संभावना है। इस बीच अमरनाथ यात्रियों को भी अगले 24 घंटों तक नहीं जाना चाहिए। राष्ट्रीय राजमार्गों पर असर पड़ सकता है।