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Jammu News: सांबा-मानसर मार्ग पर एंबुलेंस थमी तो कीचड़ के बीच चारपाई पर शव लेकर पैदल चले लाचार
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अंतिम सफर में भी सिस्टम ने दी बेबसी : बदहाली पर आज फूटेगा जनता का गुस्सा
विशाल जसरोटिया
सांबा। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले से विकास के बड़े-बड़े दावों को मुंह चिढ़ाती एक ऐसी मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के सांबा-मानसर मार्ग की बदहाली और सरकारी महकमों की घोर लापरवाही के कारण एक दुखी परिवार को अपने परिजन के अंतिम सफर में भी वो बेबसी और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए। रविवार को बारिश के कारण पूरी तरह जमींदोज हो चुकी सड़क पर जब शव लेकर जा रही एंबुलेंस फंस गई, तो लाचार परिजन रोते-बिलखते हुए चारपाई पर शव रखकर कीचड़ और मलबे के बीच पैदल आगे बढ़ना पड़ा।
यह दर्दनाक वाकया रविवार को उस वक्त पेश आया जब एक परिवार अपने प्रियजन के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में लेकर अंतिम संस्कार के लिए जा रहा था। परिवार अपनों को खोने के गम में डूबा हुआ था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आगे सिस्टम की लापरवाही उनका रास्ता रोके खड़ी है। सांबा-मानसर मार्ग पर लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं और सड़क पूरी तरह कीचड़ के दलदल में तब्दील हो चुकी है।
एंबुलेंस जब एक बेहद खराब हिस्से पर पहुंची, तो उसके पहिए आगे बढ़ने से पूरी तरह जवाब दे गए। काफी कोशिशों के बाद भी जब गाड़ी टस से मस नहीं हुई, तो परिजनों की उम्मीदें और हौसला दोनों टूट गए। रास्ते के बीचों-बीच खड़ी एंबुलेंस से शव को आगे ले जाने का कोई और साधन नहीं दिख रहा था। आखिरकार, बेबस परिजनों ने पास के एक स्थानीय घर से एक चारपाई मांगी। इसके बाद शव को उस चारपाई पर रखा गया और परिवार के लोगों ने भारी मन से अपनों के शव को कंधों पर उठाया। घुटनों तक गहरे कीचड़, मलबे और पत्थरों के बीच संतुलन बनाते हुए वे कुछ दूरी तक पैदल चले, जिसके बाद आगे जाकर शव को एक दूसरी गाड़ी में स्थानांतरित किया जा सका। इस मंजर को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और व्यवस्था के प्रति गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
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हजारों जिंदगियां रास्ते में कैद, जी का जंजाल बना मार्ग
स्थानीय निवासी दीदार सिंह, अजय सिंह, रोषु शर्मा और सलीम ने बेहद आक्रोशित लहजे में बताया कि लगातार हो रही बारिश ने इस मुख्य मार्ग को पूरी तरह तबाह कर दिया है। सड़क के कई हिस्सों में मिट्टी खिसकने और डंगे टूटने के कारण यहां से वाहनों का गुजरना मौत को दावत देने जैसा हो गया है। शनिवार रात से ही मार्ग पूरी तरह बंद होने के कारण इस रूट पर हजारों लोग बीच रास्ते में फंसे हुए हैं।
मरीज और एंबुलेंस :
अस्पतालों के लिए निकले गंभीर मरीज और आपातकालीन वाहन घंटों से जाम में फंसे मरीज अपनी सांसों की लड़ाई लड़ते रहे।
छात्र और नौकरीपेशा :
स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र और रोज कमाने-खाने वाले लोग अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
यात्री और चालक :
प्रसिद्ध मानसर झील की ओर जाने वाले पर्यटक, आम राहगीर और भारी वाहनों के चालक बिना पानी और भोजन के गाड़ियों में रात गुजारने को मजबूर हैं।
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आश्वासन नहीं-समाधान चाहिए, आज सुबह 9 बजे से चक्का जाम का एलान
ग्रामीणों और वाहन चालकों का आरोप है कि सांबा-मानसर मार्ग की इस खस्ताहाल स्थिति को लेकर कई बार जिला प्रशासन और सीमा सड़क संगठन के आला अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए गए। हर बार लोगों को केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाकर वापस भेज दिया गया, लेकिन धरातल पर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। बारिश के दिनों में कीचड़ और मलबे के कारण हालात हर दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। प्रशासन की इस लगातार अनदेखी और संवेदनहीनता से नाराज होकर स्थानीय जनता का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। लोगों ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे सोमवार, 31 अगस्त को सुबह 9 बजे से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोककर उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब वे किसी भी खोखले आश्वासन पर पीछे नहीं हटेंगे। जब तक सड़क की तत्काल मरम्मत और यहां सुरक्षित आवाजाही के लिए ठोस और परमानेंट कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।
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प्रशासन ने बीआरओ को आवाजाही सुचारु रखने के दिए थे निर्देश
जिला प्रशासन की ओर से डीसी सांबा आयुषी सूदन ने बीआरओ को मार्ग पर उचित प्रबंध करने और आवाजाही सुचारू रखने के निर्देश दिए थे। बीआरओ अधिकारियों ने भी लोगों को सड़क की स्थिति जल्द सुधारने का भरोसा दिलाया था, लेकिन लोगों का कहना है कि इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बीआरओ के पास पूरी सड़क की मरम्मत के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते पूरे मार्ग की मरम्मत नहीं हो पा रही है। लोगों की मांग है कि सड़क की तत्काल मरम्मत के साथ इसके लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाए, ताकि बारिश के दौरान बार-बार मार्ग बंद होने और लोगों को ऐसी परेशानी झेलने की नौबत न आए।
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विशाल जसरोटिया
सांबा। जम्मू-कश्मीर के सांबा जिले से विकास के बड़े-बड़े दावों को मुंह चिढ़ाती एक ऐसी मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जिसने पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां के सांबा-मानसर मार्ग की बदहाली और सरकारी महकमों की घोर लापरवाही के कारण एक दुखी परिवार को अपने परिजन के अंतिम सफर में भी वो बेबसी और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी, जिसकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाए। रविवार को बारिश के कारण पूरी तरह जमींदोज हो चुकी सड़क पर जब शव लेकर जा रही एंबुलेंस फंस गई, तो लाचार परिजन रोते-बिलखते हुए चारपाई पर शव रखकर कीचड़ और मलबे के बीच पैदल आगे बढ़ना पड़ा।
यह दर्दनाक वाकया रविवार को उस वक्त पेश आया जब एक परिवार अपने प्रियजन के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस में लेकर अंतिम संस्कार के लिए जा रहा था। परिवार अपनों को खोने के गम में डूबा हुआ था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि आगे सिस्टम की लापरवाही उनका रास्ता रोके खड़ी है। सांबा-मानसर मार्ग पर लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन के कारण जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं और सड़क पूरी तरह कीचड़ के दलदल में तब्दील हो चुकी है।
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एंबुलेंस जब एक बेहद खराब हिस्से पर पहुंची, तो उसके पहिए आगे बढ़ने से पूरी तरह जवाब दे गए। काफी कोशिशों के बाद भी जब गाड़ी टस से मस नहीं हुई, तो परिजनों की उम्मीदें और हौसला दोनों टूट गए। रास्ते के बीचों-बीच खड़ी एंबुलेंस से शव को आगे ले जाने का कोई और साधन नहीं दिख रहा था। आखिरकार, बेबस परिजनों ने पास के एक स्थानीय घर से एक चारपाई मांगी। इसके बाद शव को उस चारपाई पर रखा गया और परिवार के लोगों ने भारी मन से अपनों के शव को कंधों पर उठाया। घुटनों तक गहरे कीचड़, मलबे और पत्थरों के बीच संतुलन बनाते हुए वे कुछ दूरी तक पैदल चले, जिसके बाद आगे जाकर शव को एक दूसरी गाड़ी में स्थानांतरित किया जा सका। इस मंजर को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं और व्यवस्था के प्रति गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
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हजारों जिंदगियां रास्ते में कैद, जी का जंजाल बना मार्ग
स्थानीय निवासी दीदार सिंह, अजय सिंह, रोषु शर्मा और सलीम ने बेहद आक्रोशित लहजे में बताया कि लगातार हो रही बारिश ने इस मुख्य मार्ग को पूरी तरह तबाह कर दिया है। सड़क के कई हिस्सों में मिट्टी खिसकने और डंगे टूटने के कारण यहां से वाहनों का गुजरना मौत को दावत देने जैसा हो गया है। शनिवार रात से ही मार्ग पूरी तरह बंद होने के कारण इस रूट पर हजारों लोग बीच रास्ते में फंसे हुए हैं।
मरीज और एंबुलेंस :
अस्पतालों के लिए निकले गंभीर मरीज और आपातकालीन वाहन घंटों से जाम में फंसे मरीज अपनी सांसों की लड़ाई लड़ते रहे।
छात्र और नौकरीपेशा :
स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र और रोज कमाने-खाने वाले लोग अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
यात्री और चालक :
प्रसिद्ध मानसर झील की ओर जाने वाले पर्यटक, आम राहगीर और भारी वाहनों के चालक बिना पानी और भोजन के गाड़ियों में रात गुजारने को मजबूर हैं।
आश्वासन नहीं-समाधान चाहिए, आज सुबह 9 बजे से चक्का जाम का एलान
ग्रामीणों और वाहन चालकों का आरोप है कि सांबा-मानसर मार्ग की इस खस्ताहाल स्थिति को लेकर कई बार जिला प्रशासन और सीमा सड़क संगठन के आला अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए गए। हर बार लोगों को केवल आश्वासन की घुट्टी पिलाकर वापस भेज दिया गया, लेकिन धरातल पर समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। बारिश के दिनों में कीचड़ और मलबे के कारण हालात हर दिन बद से बदतर होते जा रहे हैं। प्रशासन की इस लगातार अनदेखी और संवेदनहीनता से नाराज होकर स्थानीय जनता का सब्र अब पूरी तरह टूट चुका है। लोगों ने दो टूक चेतावनी दी है कि वे सोमवार, 31 अगस्त को सुबह 9 बजे से इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोककर उग्र प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब वे किसी भी खोखले आश्वासन पर पीछे नहीं हटेंगे। जब तक सड़क की तत्काल मरम्मत और यहां सुरक्षित आवाजाही के लिए ठोस और परमानेंट कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।
प्रशासन ने बीआरओ को आवाजाही सुचारु रखने के दिए थे निर्देश
जिला प्रशासन की ओर से डीसी सांबा आयुषी सूदन ने बीआरओ को मार्ग पर उचित प्रबंध करने और आवाजाही सुचारू रखने के निर्देश दिए थे। बीआरओ अधिकारियों ने भी लोगों को सड़क की स्थिति जल्द सुधारने का भरोसा दिलाया था, लेकिन लोगों का कहना है कि इसके बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, बीआरओ के पास पूरी सड़क की मरम्मत के लिए पर्याप्त फंड उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते पूरे मार्ग की मरम्मत नहीं हो पा रही है। लोगों की मांग है कि सड़क की तत्काल मरम्मत के साथ इसके लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराया जाए, ताकि बारिश के दौरान बार-बार मार्ग बंद होने और लोगों को ऐसी परेशानी झेलने की नौबत न आए।