पूर्व सांसद और कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे गिरधारी लाल डोगरा के दामाद अरुण जेटली के निधन पर उनके ससुराल भैया गांव में भी शोक की लहर है। 24 मई, 1982 को जेटली का विवाह गिरधारी लाल डोगरा की बेटी संगीता से हुआ था। पार्टी के भीतर और अन्य राजनीतिक दलों में जेटली को सम्मानजनक रूप से देखा जाता रहा है। यही वजह है कि जेटली की शादी में बीजेपी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी सहित तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने शामिल होकर आशीर्वाद दिया था। यह वह समय था, जब जेटली को राजनीति में आए कुछ ही वर्ष हुए थे। इसके बावजूद उनकी शादी में भारतीय राजनीति की उस दौर की शीर्ष हस्तियां शामिल हुईं थीं।
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अरुण जेटली
- फोटो : amar ujala
जेटली को इस शादी की वजह से मजाक में कश्मीर का जमाई बाबू भी कहा जाता था। गांव के लोगों के अनुसार गिरधारी लाल डोगरा ईमानदारी की मिसाल थे। उनकी केंद्र और राज्य सरकार में अच्छी पैठ थी। बताया कि गिरधारी लाल डोगरा और अरुण जेटली के पिता दोनों ने लाहौर विश्वविद्यालय से एलएलबी की थी और उनमें घनिष्ठ मित्रता थी। दोनों ने इस मित्रता को रिश्तेदारी में बदलने का मन बनाया और यहीं से तय हो गई थी जेटली और संगीता की शादी। डोगरा की ईमानदारी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि दिल्ली में आयोजित इस बड़े शादी समारोह में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने ही रिसेप्शन का भी आयोजन किया था।
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अरुण जेटली
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गौरतलब है कि गिरधारी लाल डोगरा आजादी के बाद से 1975 तक जम्मू-कश्मीर के वित्त मंत्री रहे। जम्मू और उधमपुर से वह कांग्रेस के सांसद भी रहे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी एक समय उन्हें लोकसभा का स्पीकर बनाना चाहती थीं, लेकिन डोगरा इसके लिए तैयार नहीं हुए। 1987 में उनका निधन हुआ था। उनकी 25वीं पुण्यतिथि पर तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उनकी जीवनी पीपल्समैन का विमोचन किया और 2015 में उनके शताब्दी समारोह में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे।
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अरुण जेटली
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जेटली की पत्नी संगीता अपने पिता की समाजसेवी प्रवृत्ति से खासी प्रभावित रहीं और इलाके में समाजसेवा के काम करती रही हैं। उनका इस क्षेत्र से लगाव इतना है कि लगातार वो अपने पैतृक गांव और पिता के स्मृति स्थल पर भी पहुंचती हैं।
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गिरधारी लाल डोगरा के नाम पर हीरानगर डिग्री कॉलेज को उनके मेमोरियल कॉलेज का नाम मिला है। यहीं डोगरा की छोटी बेटी उनके ट्रस्ट कार्यालय की अध्यक्ष भी हैं। वहीं गिरधारी लाल डोगरा के दामाद अरुण जेटली का भी जम्मू-कश्मीर से विशेष नाता रहा है। 17 जुलाई, 2015 को गिरधारी लाल डोगरा ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में जेटली अपने साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लेकर आए थे।