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देखिए बदलते कश्मीर की तस्वीरें, 31 साल बाद इस मंदिर में गूंजीं घंटियां, यहां से जुड़ी हैं बापू की यादें

Tue, 16 Feb 2021 04:35 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 16 Feb 2021 04:35 PM IST
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Basant Panchami After 31 Years In Shitalnath Temple Of Srinagar
31 साल बाद बसंत पंचमी पर गूंज उठीं मंदिर की घंटियां - फोटो : बासित जरगर

कश्मीर घाटी की फिजा बदल रही है। आतंकवाद के चरम के दौर में बंद हो चुके मंदिरों के ताले खुलने लगे हैं। झेलम नदी के किनारे स्थित प्राचीन शीतलेश्वर भैरव मंदिर में 31 वर्षों के बाद बसंत पंचमी पर मंगलवार को मंदिर की घंटियां गूंज उठीं। मंदिर परिसर में हवन कुंड एक बार फिर प्रज्जवलित हुआ। अनुच्छेद 370 खत्म होने और केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद पहली बार सनातन धर्म शीतलनाथ आश्रम सभा ने मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया। 



 

Basant Panchami After 31 Years In Shitalnath Temple Of Srinagar
31 साल बाद बसंत पंचमी पर गूंज उठीं मंदिर की घंटियां - फोटो : बासित जरगर

वर्ष 1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के पलायन के बाद घाटी के कई मंदिरों में ताले लग गए थे। अब इन मंदिरों को धीरे-धीरे खोलने का प्रयास किया जा रहा है। पंडित उपेंद्र हंडू ने बताया कि शीतलेश्वर मंदिर में 90 के दशक से पहले काफी चहल पहल हुआ करती थी।

Basant Panchami After 31 Years In Shitalnath Temple Of Srinagar
31 साल बाद बसंत पंचमी पर गूंज उठीं मंदिर की घंटियां - फोटो : बासित जरगर

आतंकवाद के शुरू होने के बाद से घाटी के सभी मंदिरों के साथ इसको भी बंद करना पड़ा। शीतलनाथ मंदिर में मंगलवार को 31 वर्षों के बाद हवन हुआ। हंडू ने बताया यह अवसर कश्मीरी पंडितों के लिए खुशी का है। हम दोबारा हिंदु-मुस्लिम-सिख भाईचारे को कश्मीर में पनपता देखना चाहते हैं। इस मंदिर में बसंत पंचमी के दिन भव्य हवन होता था। इसलिए बसंत पंचमी का दिन ही इसके लिए चुना गया। 



 
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Basant Panchami After 31 Years In Shitalnath Temple Of Srinagar
31 साल बाद बसंत पंचमी पर गूंज उठीं मंदिर की घंटियां - फोटो : बासित जरगर

इस प्राचीन मंदिर का वर्णन नीलमनपुराण में भी मिलता है। यह मंदिर कश्मीरी पंडितों की सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। मंदिर परिसर में हिंदू हाई स्कूल भी है। कश्मीरी पंडितों की आवाज़ का प्रतीक मार्तण्ड अखबार भी शीतलनाथ मंदिर के परिसर से ही निकलता था।

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Basant Panchami After 31 Years In Shitalnath Temple Of Srinagar
31 साल बाद बसंत पंचमी पर गूंज उठीं मंदिर की घंटियां - फोटो : बासित जरगर

कश्मीरी पंडितों के अनेकानेक धार्मिक उत्सव, और समारोह आदि इसी परिसर में होते थे। शीतलनाथ के मंच से महात्मा गांधी, बलराज मधोक और जवाहरलाल नेहरू जैसे राजनेताओं ने कश्मीरी लोगों को संबोधित किया है।

यह भी पढ़ेंः आतंकियों को सता रहा खात्मे का खौफ, अनंतनाग में रची ब्लास्ट की साजिश, देखिए तस्वीरें    


 
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