देश के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की आज 96वीं जयंती है। अपने मर्मस्पर्शी शब्दों से अटल जी ने राजनीति ही नहीं बल्कि आम लोगों के बीच भी अमिट छाप छोड़ी। सत्ता के गलियारों से लेकर गांव, गली, मुहल्ले तक हर शख्स अटल जी की वाकपटुता का कायल रहा है। पक्ष हो या विपक्ष सभी उनके स्वभाव के मुरीद रहे हैं। राजनीति पर उन्होंने कुछ ऐसे शब्द कहे हैं जोकि वर्तमान और भावी पीढ़ी के लिए आइना साबित होंगे...
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निर्भीकता और स्पष्टवादिता खतरे से खाली नहीं... पढ़िए सियासत पर वाजपेयी के 'अटल शब्द'
Fri, 25 Dec 2020 04:16 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 25 Dec 2020 04:16 PM IST
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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : social media
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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : पीटीआई
अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि आज की राजनीति विवेक नहीं, वाक्- चातुर्य चाहती है, संयम नहीं, श्रेय नहीं, प्रेय के पीछे पागल है। मतभेद का समादर करना तो अलग रहा, उसको सहन करने की वृत्ति भी विलुप्त हो रही है।
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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी
उन्होंने कहा कि आदर्शवाद का स्थान अवसरवाद ले रहा है। बायें (लेफ्ट) और दायें (राइट) का भेद भी व्यक्तिगत अधिक है, विचारगत कम।
आगे की स्लाइड में- सब अपनी-अपनी गोटी लाल करने में लगे हैं
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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी
अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा कि सब अपनी-अपनी गोटी लाल करने में लगे हैं, उत्तराधिकारी की शतरंज पर मोहरे बैठाने की चिंता में लीन हैं।
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भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी
उनका कहना था कि सत्ता का संघर्ष प्रतिपक्षियों से ही नहीं, स्वयं अपने ही दल वालों से हो रहा है। पद और प्रतिष्ठा को कायम करने के लिए जोड़-तोड़, सांठ-गांठ और ठकुरसुहाती आवश्यक है। निर्भीकता और स्पष्टवादिता खतरे से खाली नहीं है। आत्मा को कुचलकर ही आगे बढ़ा जा सकता है।