घाटी में आतंकवाद को मुंहतोड़ जवाब देने के साथ महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रही है सेना
सेंटर की इंचार्ज के अनुसार इस सेंटर में करीब 4-6 महीने की ट्रेनिंग दी जाती है और उसका खर्च सेना उठाती है। यहां महिलाओं को शॉल, सूट, फिरन आदि बनाना सिखाया जाता है। उनके बनाए सामान को बेचने में मदद भी सेना करती है। आगे भी ऐसे सेंटर स्थापित करने की कोशिश है, ताकि ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को लाभ मिले।
हांजिक गांव की तस्लीमा ने बताया कि सेंटर में उन्होंने बहुत कुछ सीखा है। इसमें कैश्मिलॉन शाल, स्टोल, सेमी-पश्मीना, नीडल वर्क आदि शामिल हैं। महीने का करीब 10 से 12 हजार तक कमा लेते हैं। हसीना ने कहा कि वह पिछले 8 वर्षों से यहां काम कर रही हैं। उन्होंने शुरू में यहां से आरी वर्क सीखा और अब यहां पर ही काम कर रही हैं।
शफीका ने बताया कि वह भी पिछले 7 वर्षों से अधिक समय से यहां पर है। अब वह जो भी बनाती हैं, वह आगे बाजार में बिकता है। इसी से घर का गुजारा होता है।
महिलाओं ने कहा कि सेना उन्हें कच्चा माल उपलब्ध कराने से लेकर हर एक सुविधा दे रही है। यहां तक कि उनके द्वारा बनाए गए माल को भी बेचने में मदद करती है। इसके बदले जो पैसा आता है, वह इन महिलाओं को दिया जाता है।
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