जम्मू-कश्मीर में टीबी के मामलों में आई गिरावट, जानिए किन कारणों से होती है यह बीमारी
जम्मू-कश्मीर में प्रति लाख आबादी पर 800 लोगों के थूक की जांच का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें अनुमानित 3 फीसदी टीबी के मरीज आने चाहिए। जिला ट्यूबरक्लोसीस अधिकारी डॉ मीनाक्षी कोतवाल का कहना है कि टीबी की रोकथाम और इलाज को लेकर जागरूकता बढ़ाई गई है। इसके अलावा कोविड के दौरान टीबी संक्रमितों और आम लोगों ने अधिक मास्क का उपयोग किया है, जिससे टीबी का संक्रमण कम फैला है। कोविड के दौरान टीबी मरीजों के घर जाकर उन्हें नियमित दवा के प्रबंध किए गए। जिससे जिला जम्मू और सांबा में नए मामलों में गिरावट आई है। एक टीबी का मरीज उसके संपर्क में आने वाले दस लोगों को बैक्टीरिया का संक्रमण दे सकता है। भारत में प्रतिदिन 1200-1300 लोग टीबी से मर रहे हैं, जबकि यह इलाज वाली बीमारी है।
बैक्टीरिया से मानव को मिलता है टीबी
माइको बैक्टीरियम ट्यूबर क्लोसीस नामक बैक्टीरिया मानव को टीबी से पीड़ित करता है। इसमें शारीरिक रूप से कमजोर लोग इसकी जद में ज्यादा आते हैं। बैक्टीरिया से संक्रमित व्यक्ति को अगर इलाज न दिया जाए तो वे अपने आसपास के वातावरण में बैक्टीरिया का संक्रमण फैलाता है।
2600 कोविड मरीजों के टेस्ट किए गए
स्टेट ट्यूबरक्लोसिस अफसर डॉ. संजय तुर्की के अनुसार जम्मू संभाग में ट्रूू नेट मशीन पर 2600 कोविड मरीजों के टेस्ट किए गए। इसके अलावा 13 मशीनों को विभिन्न चिकित्सा केंद्रों पर भेजा गया है, जिसमें टीबी की स्क्रीनिंग की जा रही है। इस मशीन में थूक का सैंपल लेकर दो घंटे के भीतर रिपोर्ट आ जाती है।
लक्षण
1. तीन हफ्ते तक लगातार खांसी रहना
2. शाम के समय हल्का बुखार होना
3. वजन गिरना और सांस फूलना
4. धीरे धीरे भूख कम होते जाना
5. खांसी या बलगम में खून आना