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मारा गया आठ लाख का इनामी आतंकी ललहारी, अंसार गजवात-उल-हिंद आतंकवादी संगठन का हुआ सफाया
Wed, 23 Oct 2019 11:51 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 23 Oct 2019 11:51 AM IST
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डीजीपी दिलबाग सिंह, आतंकी अब्दुल हमीद ललहारी उर्फ हारुन अब्बास
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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जम्मू-कश्मीर में मंगलवार को हुई मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए थे। इनमें अंसार गजवात उल हिंद (एजीएच) का कमांडर अब्दुल हमीद ललहारी उर्फ हारुन अब्बास भी मारा गया। इसके मारे जाने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने यह दावा किया है कि इस आतंकी संगठन का प्रदेश से सफाया हो चुका है। आपको बता दें कि इसी साल 23 मई को जाकिर मूसा को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था। जिसके बाद अब्दुल हमीद ललहारी को अंसार गजवात उल हिंद की कमान सौंपी गई थी।
आतंकी अब्दुल हमीद ललहारी उर्फ हारुन अब्बास
- फोटो : फाइल
कश्मीर में अल-कायदा की पहचान बने एजीएच के प्रवक्ता अबु उबैदा ने ऑडियो संदेश जारी कर हमीद ललहारी को कश्मीर का कमांडर बनाए जाने की पुष्टि की थी। इसके साथ ही उसने गाजी इब्राहिम खालिद को डिप्टी चीफ बनाने का एलान भी किया था।
आतंकी हामिद ललहारी
- फोटो : फाइल
कौन था आतंकी हमीद ललहारी
ललहार काकपोरा पुलवामा का रहने वाला अब्दुल हमीद लोन 29 साल का था। वह मई 2016 से सक्रिय था। उसे वर्ष 2016 में अबु दुजाना ने लश्कर में शामिल किया था। उससे पूर्व वह लश्कर का ओवरग्राउंड वर्कर था। वर्ष 2017 के अंत में जब दुजाना ने लश्कर को छोड़ अंसार उल गजवात उल हिंद का दामन थामा था तो ललहारी जाकिर मूसा के गुट का हिस्सा बन गया था। उसे बीते साल सितंबर के दौरान सुरक्षाबलों ने कश्मीर में सक्रिय सूचीबद्ध आतंकियों की बी-श्रेणी में शामिल किया था। सुरक्षाबलों ने उस पर सात लाख का ईनाम घोषित कर रखा था।
ललहार काकपोरा पुलवामा का रहने वाला अब्दुल हमीद लोन 29 साल का था। वह मई 2016 से सक्रिय था। उसे वर्ष 2016 में अबु दुजाना ने लश्कर में शामिल किया था। उससे पूर्व वह लश्कर का ओवरग्राउंड वर्कर था। वर्ष 2017 के अंत में जब दुजाना ने लश्कर को छोड़ अंसार उल गजवात उल हिंद का दामन थामा था तो ललहारी जाकिर मूसा के गुट का हिस्सा बन गया था। उसे बीते साल सितंबर के दौरान सुरक्षाबलों ने कश्मीर में सक्रिय सूचीबद्ध आतंकियों की बी-श्रेणी में शामिल किया था। सुरक्षाबलों ने उस पर सात लाख का ईनाम घोषित कर रखा था।
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पाकिस्तान से मिलता था बैकअप
इस बारे में सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंसार गजवात उल हिंद (एजीएच) आतंकवादी ग्रुप के रिश्ते पाकिस्तान से होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान कश्मीर घाटी में आतंकवाद फैलाने के लिए मुखौटों का इस्तेमाल करता रहा है। यह ग्रुप अल-कायदा से जुड़े होने का दावा करता है, लेकिन उसके तार पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। हिज्बुल मुजाहिदीन का पूर्व कमांडर मूसा को 27 जुलाई 2017 को अंसार गजवत उल हिंद की कश्मीर सेल का मुखिया बनाया गया था। मूसा को पहले 2016 में मारे गए हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी की जगह दी गई थी।'
इस बारे में सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अंसार गजवात उल हिंद (एजीएच) आतंकवादी ग्रुप के रिश्ते पाकिस्तान से होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान कश्मीर घाटी में आतंकवाद फैलाने के लिए मुखौटों का इस्तेमाल करता रहा है। यह ग्रुप अल-कायदा से जुड़े होने का दावा करता है, लेकिन उसके तार पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों से जुड़े हो सकते हैं। हिज्बुल मुजाहिदीन का पूर्व कमांडर मूसा को 27 जुलाई 2017 को अंसार गजवत उल हिंद की कश्मीर सेल का मुखिया बनाया गया था। मूसा को पहले 2016 में मारे गए हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी की जगह दी गई थी।'
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जाकिर मूसा
- फोटो : फाइल
जानिए कौन था आतंकी मूसा
यह वही जाकिर मूसा था जिसके नाम से आतंकियों के जनाजे में 'मूसा मूसा जाकिर मूसा' नाम के नारे लगाए जाते थे। जब भी कोई आतंकी मारा जाता था तो मूसा को वहां अकसर देखा जाता था। जाकिर मूसा इंजीनियरिंग का छात्र था। 29 साल के मूसा ने बीटेक की पढ़ाई की हुई थी। मूसा भी आतंकी बुरहान वानी के गांव पुलवामा के त्राल का रहने वाला था। 2013 में इसने हिजबुल मुजाहिदीन का हाथ थामा था। जब 2016 में सुरक्षाबलों ने हिजबुल के पोस्टर बॉय बुरहान वानी को मार गिराया तो उससे पहले मूसा भी बुरहान के साथ था। इसके मारे जाने के बाद मूसा ने हिजबुल से किनारा कर लिया था।
यह वही जाकिर मूसा था जिसके नाम से आतंकियों के जनाजे में 'मूसा मूसा जाकिर मूसा' नाम के नारे लगाए जाते थे। जब भी कोई आतंकी मारा जाता था तो मूसा को वहां अकसर देखा जाता था। जाकिर मूसा इंजीनियरिंग का छात्र था। 29 साल के मूसा ने बीटेक की पढ़ाई की हुई थी। मूसा भी आतंकी बुरहान वानी के गांव पुलवामा के त्राल का रहने वाला था। 2013 में इसने हिजबुल मुजाहिदीन का हाथ थामा था। जब 2016 में सुरक्षाबलों ने हिजबुल के पोस्टर बॉय बुरहान वानी को मार गिराया तो उससे पहले मूसा भी बुरहान के साथ था। इसके मारे जाने के बाद मूसा ने हिजबुल से किनारा कर लिया था।