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जम्मू: दूसरी खेप में 160 बांग्लादेशी घुसपैठियों को भेजा पश्चिम बंगाल, वायुसेना के विशेष विमान से किया रवाना

Thu, 08 Oct 2026 12:31 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू-श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू-श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Oct 2026 12:31 AM IST
सार

बुधवार को दूसरी खेप में 160 घुसपैठियों को वायुसेना के विशेष विमान से पश्चिम बंगाल भेजा गया। इससे पहले पांच अक्तूबर को पहली खेप में 150 घुसपैठियों को भेजा गया था। दो दिन में 310 को जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजा जा चुका है।

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Jammu: Second batch of 160 Bangladeshi infiltrators sent to West Bengal
अभियान जारी... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई अब अगले चरण में पहुंच गई है। बुधवार को दूसरी खेप में 160 घुसपैठियों को वायुसेना के विशेष विमान से पश्चिम बंगाल भेजा गया। इससे पहले पांच अक्तूबर को पहली खेप में 150 घुसपैठियों को भेजा गया था।

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दो दिन में 310 को जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजा जा चुका है। कार्रवाई का दायरा बढ़ने के साथ अब सुरक्षा एजेंसियों का फोकस ऐसे लोगों की पहचान, उनके स्थानीय संपर्कों और यहां तक पहुंचने के नेटवर्क की पड़ताल पर है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही इस बड़े नेटवर्क पर भी कार्रवाई हो सकती है।
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बुधवार को सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद 160 घुसपैठियों को विशेष विमान से रवाना किया गया। पहली खेप की कार्रवाई के बाद दूसरी खेप में संख्या बढ़ना इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का संकेत माना जा रहा है। संबंधित एजेंसियां दस्तावेज और पहचान के सत्यापन के आधार पर चिह्नित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर रही हैं।
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सिर्फ बाहर भेजना नहीं, नेटवर्क की पड़ताल भी अहम
सुरक्षा के लिहाज से चुनौती केवल अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशियों व रोहिंग्याओं की पहचान तक सीमित नहीं है। एजेंसियों के सामने यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण है कि ये लोग जम्मू-कश्मीर तक कैसे पहुंचे, उन्हें यहां रहने के लिए किसने मदद दी और क्या किसी संगठित नेटवर्क ने उन्हें बसाने में भूमिका निभाई। इसलिए सत्यापन और कार्रवाई के साथ स्थानीय स्तर पर उनके संपर्कों की जानकारी जुटाना भी अहम होगा।

सुरक्षा पर असर
जम्मू-कश्मीर की संवेदनशील सुरक्षा परिस्थितियों में बिना वैध दस्तावेज रह रहे विदेशी नागरिकों की मौजूदगी सुरक्षा एजेंसियों के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकती है। विशेष रूप से सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में उनकी आवाजाही, पहचान और स्थानीय संपर्कों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। ऐसे में सत्यापन अभियान से संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और सुरक्षा संबंधी सूचनाओं का नेटवर्क मजबूत करने में मदद मिल सकती है।


अब सत्यापन और कार्रवाई पर नजर
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार 310 घुसपैठियों को बाहर भेजे जाने के बाद अब निगाह इस बात पर है कि जांच में और कितने लोगों की पहचान होती है। आगे की रणनीति में दस्तावेज का सत्यापन, संदिग्धों की पहचान, स्थानीय संपर्कों की जांच और नियमानुसार उन्हें जम्मू-कश्मीर से बाहर भेजने की प्रक्रिया प्रमुख रहेगी। साथ ही उन लोगों की दोबारा पहचान सुनिश्चित करना भी चुनौती होगी, जो कार्रवाई से बचने के लिए अपना ठिकाना बदल सकते हैं।

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