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फारूक अब्दुल्ला के बाद कई और नेताओं पर लटकी पीएसए की तलवार, उमर-महबूबा भी लिस्ट में
Tue, 17 Sep 2019 01:35 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Tue, 17 Sep 2019 01:35 AM IST
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कश्मीरी नेता
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
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नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला पर पीएसए लगाए जाने के बाद कश्मीर केंद्रित कई और नेताओं पर पीएसए की तलवार लटकी है। सूत्रों का कहना है कि हिरासत में लिए गए नेताओं को अधिक दिनों तक बंद रखने के लिए पीएसए के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला व महबूबा मुफ्ती समेत पूर्व मंत्री सज्जाद गनी लोन, इमरान रजा अंसारी, नेकां के मुबारक गुल, पीडीपी के पूर्व मंत्री नईम अख्तर व अब्दुल रहमान वीरी, सरताज मदनी, पीरजदा मंसूर, खुर्शीद आलम, फारूक अंद्राबी, नेकां के अल्ताफ कल्लू समेत विभिन्न पार्टियों के राजनीतिक नेताओं को राज्य का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद एहतियातन हिरासत में लिया गया है। माना जा रहा है कि इनमें से कई नेताओं को सरकार पीएसए में निरुद्ध कर सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम उमर अब्दुल्ला
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
आपको बता दें कि जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किए जाने के बाद पिछले 41 दिनों से नजरबंद पूर्व मुख्यमंत्री तथा श्रीनगर से नेकां सांसद डॉ. फारूक अब्दुल्ला को जन सुरक्षा कानून (पीएसए) के तहत हिरासत में लिया गया है। यह कार्रवाई रविवार रात को की गई। इसके बाद उनके गुपकार स्थित आवास को ही जेल घोषित कर दिया गया है। आस-पास के इलाकों में कंटीले तार लगा दिए गए हैं। फारूक जम्मू-कश्मीर के तीन बार मुख्यमंत्री रहे हैं।
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नेकां के नेता मुबारक गुल
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
फारूक को पीएसए के लोक व्यवस्था प्रावधान के तहत गिरफ्तार किया गया है जो अधिकारियों को किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे छह महीने तक हिरासत में रखने की अनुमति देता है। पीएसए के तहत दो प्रावधान हैं-लोक व्यवस्था और राज्य की सुरक्षा को खतरा। लोक व्यवस्था वाले प्रावधान के तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के छह महीने और दूसरे प्रावधान के तहत दो साल तक हिरासत में रखा जा सकता है।
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नईम अख्तर
- फोटो : फाइल, अमर उजाला
पूर्व मुख्यमंत्री को अदालत के समक्ष पेश करने का आग्रह करने वाली याचिका पर उच्चतम न्यायालय द्वारा सोमवार को केंद्र और जम्मू कश्मीर प्रशासन से जवाब मांगने से एक दिन पहले अब्दुल्ला को पीएसए के तहत हिरासत में लिया गया। याचिका एमडीएमके नेता वाइको ने दायर की थी। उन्होंने अब्दुल्ला की रिहाई की मांग की थी जिससे वह चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हो सकें। वाइको और अब्दुल्ला चार दशक से करीबी मित्र रहे हैं। पीएसए केवल जम्मू कश्मीर में लागू है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) है। फारूक अब्दुल्ला के बेटे एवं पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती तथा अन्य कई नेता भी पांच अगस्त से हिरासत में हैं।