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वायुसेना और सेना की मदद से एयरलिफ्ट किए जाएंगे चादर ट्रैक पर फंसे 41 ट्रैकर्स, तापमान -30 से भी नीचे
Mon, 13 Jan 2020 09:13 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 13 Jan 2020 09:13 PM IST
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चादर ट्रैक
- फोटो : अमर उजाला
लद्दाख में बिगड़ा मौसम का मिजाज नेरक में फंसे ट्रैकर्स के लिए राहत लाता नहीं दिख रहा है। जांस्कार ट्रेक से रेक्सयू कर नेरक गांव में ठहराए गए 41 ट्रैकर्स के लिए प्रशासन ने सोमवार को चॉपर से रेस्क्यू कर लेह पहुंचाने की योजना बनाई थी लेकिन खराब मौसम दगा दे गया। बर्फबारी जारी रहने से चॉपर उड़ान नहीं भर सके हैं। ट्रैकर्स को सुरक्षित लेह तक पहुंचाने के लिए वायुसेना और सेना की मदद ली जा रही है।
चादर ट्रैक
- फोटो : अमर उजाला
एसएसपी लेह सरगुन शुक्ला ने बताया कि सभी ट्रैकर्स नेरक गांव में सुरक्षित जहां प्रशासन की ओर से उन्हें जरूरत का सभी सामान मुहैया करवाया हुआ है। वायुसेना और सेना से चॉपर मुहैया करवाने की मदद मांगी गई थी। सोमवार को बर्फबारी जारी रहने से चॉपर उड़ान नहीं भर सकें हैं। मौसम अनुकूल होते ही ट्रैकर्स को लेह पहुंचा दिया जाएगा।
चादर ट्रैक
- फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि आठ जनवरी को दूसरे जत्थे में रवाना हुए ट्रैकर्स को शुक्रवार को जिस कैंप में रिपोर्ट करना था वहां वो नहीं पहुचे थे। शनिवार को दूसरा दल भी कैंप तक नहीं पहुंच पाया था। ऐसे में रविवार को दोनों दल के 41 सदस्यों को सुरक्षित नेरक गांव तक पहुंचा दिया गया है। जहां उनकी देखभाल की जा रही है। बताया कि ट्रैक पर फंसे पर्यटकों में विदेशी और भारतीय ट्रैकर्स शामिल हैं। फिलहाल जंस्कार ट्रैक को प्रशासन की ओर से अस्थाई तौर पर स्थगित कर दिया गया है।
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चादर ट्रैक
- फोटो : अमर उजाला
ज्ञात रहे कि चादर ट्रैक पर गए दो ग्रुप में शामिल 41 लोगों के दल को रविवार को प्रशासन की ओर से सुरक्षित रेस्कयू कर लिया गया था। जमी हुई जंस्कार नदी पर पानी बढ़ जाने के चलते ट्रैकर्स के यह दल अपने अपने कैंप पर रिपोर्ट नहीं कर पाए और रात जिंदगी और मौत के बीच गुजारने को मजबूर हो गए। लापता हुए ट्रैकर्स टिब्ब गुफा और नेरक झरने के रूट में जलस्तर बढ़ने से रूक गए थे।
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चादर ट्रैक
- फोटो : अमर उजाला
विश्व के सबसे जोखिम भरे ट्रैक में से एक चादर ट्रैक लेह और जांस्कार को जोड़ने वाली जमी हुई जांस्कार नदी पर जनवरी और फरवरी माह के बीच अंजाम दिया जाता है जिसमें हर साल सैंकड़ों की तादाद में देश और विदेश से रोमांच के दिवाने पहुंचते रहे हैं। इस बार ट्रैक को सात जनवरी से शुरू करवाया गया था।