जम्मू-कश्मीर के लेह-लद्दाख में सेना और स्थानीय लोगों का समन्वय कुछ इस तरह है कि सेना ने लोगों की बड़ी समस्या का हल कर दिया। लद्दाख की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रही सेना की उत्तरी कमान की फायर एंड फ्यूरी कोर के कांबेट इंजीनियर्स ने सिंधु नदी पर 40 दिन में 260 फुट लंबा लोहे से बना केबल सस्पेंशन पुल बनाया है। इस पुल को 'मैत्री ब्रिज' नाम दिया गया है।
{"_id":"5ca30928bdec22144b7f01a7","slug":"260-feet-cable-suspension-bridge-made-by-indian-army-longest-suspension-bridge-over-indus","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"लद्दाख में सेना ने 40 दिन में सिंधु नदी पर बनाया 260 फीट का सस्पेंशन पुल, मैत्री ब्रिज दिया नाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लद्दाख में सेना ने 40 दिन में सिंधु नदी पर बनाया 260 फीट का सस्पेंशन पुल, मैत्री ब्रिज दिया नाम
Tue, 02 Apr 2019 12:33 PM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: देव कश्यप
Updated Tue, 02 Apr 2019 12:33 PM IST
विज्ञापन
मैत्री ब्रिज
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मैत्री ब्रिज पर जश्न मनाते सेना के ऑफिसर्स
- फोटो : अमर उजाला
लेह के चोगलमसर में 89 वर्ष के सेवानिवृत सैनिक नायक फुंचोक आंगदस के नेतृत्व में 1947 से लेकर कारगिल युद्ध में हिस्सा ले चुके पूर्व सैनिकों ने सोमवार को इस पुल का उद्घाटन किया।
मैत्री ब्रिज का हुआ उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
इस मौके पर कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी, लेह की डिप्टी कमिश्नर अवनी लवासा, सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी और क्षेत्र के गणमान्य लोग मौजूद थे। सेना ने कारगिल युद्ध के 20 वर्ष पूरा होने के उपलक्ष्य में यह पुल बनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मैत्री ब्रिज का हुआ उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
इसके बनने से चोगलमसर, स्टोक व चुछोत गांव के लोगों को फायदा होगा। प्रशासन ने नदी पार स्थित गांवों के लोगों की परेशानियों को देखते हुए सेना से पुल बनाने का आग्रह किया था। इसके बाद सेना ने मुहिम छेड़ दी।
विज्ञापन
मैत्री ब्रिज का हुआ उद्घाटन
- फोटो : अमर उजाला
40 दिन के अंदर सेना के इंजीनियर्स ने युद्ध स्तर पर कार्य कर पुल बनाकर लोगों की दशकों पुरानी समस्या का समाधान कर दिखाया। लोगों ने पुल खुलने पर सेना का आभार जताया। इसी बीच सेना के इंजीनियर्स ने पुल बनाने के लिए 500 टन साजोसामान को मौके पर पहुंचाया। इसे पूरा करने के लिए दिन रात काम किया गया।