इस घिनौने खेल में मामूली लोग नहीं बल्कि सरकारी डॉक्टर, थानेदार, एडवोकेट, बैंक मैनेजर व इंश्योरेंस इंवेस्टिगेटर तक अहम किरदार निभा रहे हैं। इस अंतराज्यीय गिरोह में शामिल ये लोग शातिराना अंदाज में इंश्योरेंस कंपनियों से एक्सीडेंट डेथ क्लेम उठाने के लिए पहले जिंदा इंसान का इंश्योरेंस करवाते हैं। फिर उसे फर्जी तरीके से एक्सीडेंट में मृत होना साबित करते हैं। इसके बाद फर्जी ही पोस्टमार्टम कर डेथ सर्टिफिकेट तैयार कर मिलकर लाखों रुपए एक्सीडेंट डेथ क्लेम उठाते हैं।
फिल्ड इंवेस्टिगेशन फर्म का संचालक है मुख्य सूत्रधार
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शातिर गैंग
- फोटो : Vishnu Sharma
ठगी का यह खुलासा किया राजस्थान पुलिस के स्पेशल आॅपरेशन ग्रुप की टीम और दौसा जिले की कोतवाली थाना पुलिस ने। इस गैंग का मुख्य सूत्रधार इंश्योरेंस कंपनी का क्लेम उठाने से पहले फिल्ड इंवेस्टिगेशन करवाने वाली नई दिल्ली की एक फर्म का संचालक गिरफ्तार रघुराज सिंह चौहान (36) है। एसओजी एडीजी उमेश मिश्रा ने बताया कि इसके अलावा राजेश कुमार (48) निवासी गुरुग्राम, हरियाणा, जो मैनेजर यूनियन बैंक आॅफ इंडिया है। तीसरा आरोपी एडवोकेट चतुर्भुज मीणा (48) निवासी नांगल राजावतान, दौसा है। चौथा आरोपी यशवंत सिंह उर्फ यश चौहान निवासी उत्तर प्रदेश हाल ओखला, नई दिल्ली है। पांचवां आरोपी रमेशचंद्र जाटव (49) निवासी हिंडौन सिटी, करौली हाल सहायक पुलिस निरीक्षक थाना रामगढ़ पचवारा जिला दौसा है। जबकि छठां आरोपी डॉक्टर सतीश कुमार खंडेलवाल (54) निवासी आदर्श कॉलोनी, थाना कोतवाली जिला दौसा है। वह सरकारी अस्पताल में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी भी है। इसके अलावा दिल्ली निवासी आॅटोरिक्शा चालक जितेंद्र सिंह व उसकी पत्नी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
ठगी के लिए अपनाया यह शातिराना तरीका
ठगी की इस प्रोफेशनल गैंग में एक सरकारी डॉक्टर, थानेदार, एडवोकेट, बैंक मैनेजर और अन्य लोगों ने अलग-अलग किरदार निभाया। मास्टरमाइंड रघुराज सिंह चौहान ने दिल्ली के ही आॅटोरिक्शा चालक जितेंद्र सिंह की दौसा जिले में पिछले साल एक्सीडेंट में मौत होना बताया। इसके बाद तत्कालीन कोतवाली थाने में तैनात एएसआई रमेशचंद्र जाटव, दौसा चिकित्सालय में पदस्थापित सीनियर डॉक्टर सतीश खंडेलवाल, एडवोकेट चतुर्भुज मीणा के साथ मिलकर कोर्ट इस्तगासे से एक्सीडेंट में जितेंद्र की मौत की रिपोर्ट कोतवाली थाने में दर्ज करवाई।
फर्जी कोर्ट इस्तगासा तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी फर्जी
डॉक्टर सतीश ने अकेले ही घटनास्थल यानी सड़क पर अकेले ही लाश का पोस्टमार्टम करने की रिपोर्ट बना दी। जबकि पंचनामे में लाश मुर्दाघर में होना बता दिया। वहीं, रघुराज ने इंश्योरेंस क्लेम के लिए अपने बैंक मैनेजर दोस्त की मदद लेकर झूठी फिल्ड इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट तैयार की। फिर बजाज इंश्योरेंस और प्रधानमंत्री जीवन सुरक्षा योजना और जीवन ज्योति बीमा योजनाओं से 16 लाख रूपयों का क्लेम उठा लिया और रूपयों का बंटवारा कर लिया। शातिर ठगों ने जिंदा आॅटोरिक्शा चालक जितेंद्र सिंह का 4 इंश्योरेंस कंपनियों से करीब 50 लाख रुपयों का इंश्योरेंस करवाया था। नोमिनी जितेंद्र सिंह की पत्नी सुधा को बनवा दिया।
युवक की कैंसर से मौत, मुकदमा रोड एक्सीडेंट का
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प्रेस कॉफ्रेंस में जानकारी देते एसओजी आॅफिसर्स
- फोटो : Vishnu Sharma
बजाज इंश्योरेंस के बाद बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से डेथ क्लेम उठाने का प्रयास कर रहे थे। तभी कोतवाली थाना, दौसा में तैनात एक एएसआई सुवर्ण सिंह की सूझबूझ से इस षड़यंत्र का पता चला और तब डीजीपी ओपी गल्होत्रा के निर्देश पर यह मुकदमा एसओजी को ट्रांसफर कर दिया गया। तब एएसपी करन शर्मा को जांच सौंपी गई। इसी तरह, इस गिरोह ने दौसा जिले में रामगढ़ पचवारा में कैंसर की बीमारी एक व्यक्ति की मौत के करीब पांच माह बाद एक्सीडेंट में मौत होने की झूठा मुकदमा कोर्ट इस्तगासे से दर्ज करवाया। इसके पीछे भी इंश्योरेंस क्लेम की मोटी रकम हासिल करना थी। लेकिन तब पुलिस ने मृतक के भाई नंदलाल को गिरफ्तार कर लिया था। लेकिन बाकी ये आरोपी गिरफ्त से दूर थे।