भाजपा में मोदी-शाह के युग के आने के बाद दोनों ने विरोधियों के सबसे अधिक जातिवाद और वंशवाद के मुद्दे पर घेरा है। लेकिन गुजरात चुनाव के नतीजों ने भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को भी राजनीति की इस पुरानी चाल चलने पर मजबूर कर दिया है। दरअसल पार्टी ने राजस्थान में होने जा रहे महत्वपूर्ण उपचुनाव के लिए वंशवाद और जातिवाद के आधार पर ही टिकिट बांटे है। तीन माह तक इन चुनावों के लिए भाजपा मंथन करती रही और अंत में टिकिट दिया गया जाति और वंश के रिपोर्ट कार्ड पर है।
इन्हें बनाया उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी ने अलवर, अजमेर लोकसभा व मांडलगढ़ विधानसभा उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। अनुमान को सही साबित करते हुए पार्टी ने अजमेर से पूर्व भाजपा सांसद और मोदी सरकार में मंत्री रहे सांवरलाल जाट के पुत्र रामस्वरुप लांबा को उम्मीदवार बनाया है। जबकि अलवर में पार्टी ने कांग्रेस के अनुसार जातिवाद का कार्ड खेलते हुए डॉ जसवंत सिंह यादव को उम्मीदवार बनाया है। वहीं पार्टी ने मांडलगढ विधानसभा चुनाव में क्षेत्र में राजपूत मतदाताओं की संख्या को देखते हुए शक्ति सिंह हाड़ा को मैदान में उतारा है।
तीन माह में भी नहीं ढूंढ सके उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान ईकाई से लेकर केन्द्रीय ईकाई बीते तीन माह से उपचुनाव के लिए उम्मीदवारों की तलाश में थी। लेकिन जो उम्मीदवार पार्टी ने इन चुनावों की नामांकन प्रक्रिया खत्म होने से तीन दिन पूर्व घोषित किए है उनमें कोई भी चौंकाने वाला नाम नहीं है। क्योंकि घोषित किए गए तीनों उम्मीदवार जातिगात और वंशवाद के दम पर इन चुनावों की घोषणा से पहले ही ताल ठोंकते नजर आए है। अब सवाल उठने लगे है कि केन्द्र और राज्य में सत्तासीन पार्टी आखिरी नए उम्मीदवार क्यों नहीं ढूंढ सकी।
विरोधियों के निशाने पर भाजपा
राजस्थान में जिन सीटों पर उपचुनाव हो रहा है वे अभी तक भाजपा के पास थी। वसुंधरा राजे सरकार के सामने यह उपचुनाव चुनौती बन गए है। क्योंकि पड़ौसी राज्य गुजरात में भाजपा को जीतने के लिए खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। लेकिन जाति और वंश के आधार पर टिकिट बांटकर पार्टी विरोधियों की निशाने पर आ गई है। विपक्षी नेता मोदी और शाह के भाषणों की याद दिला रहे है। वहीं राजनीतिक जानकारों का कहना है भाजपा का यह दांव उपचुनावों में उसी के खिलाफ विरोधियों का हथियार बन सकता है।
कांग्रेस ने यहां चौंकाया
वहीं दूसरी और विपक्षी कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों से भाजपा को चौंका दिया है। क्योंकि पार्टी ने अजमेर में जतिगत राजनीति के उलट डॉ रघु शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। जबकि इस सीट पर गुर्जर और जाट मतदाता हार जीत का निर्णय करते है। वहीं अलवर में पार्टी करीब 15 दिन पूर्व ही पूर्व सांसद डॉ करण सिंह यादव को उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। जबकि मांडलगढ़ में कांग्रेस ने विवेक धाकड़ को प्रत्याशी बनाया है।