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जागरूक किसान: पराली से मशरूम उत्पादन कर और खाद बना पर्यावरण बचा रहे राहुल चौहान
Thu, 18 Nov 2021 12:21 PM IST
भूपेंद्र सिंह
रविंद्र कौशिक, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत(हरियाणा)
रविंद्र कौशिक, संवाद न्यूज एजेंसी, सोनीपत(हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Thu, 18 Nov 2021 12:21 PM IST
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गांव अटेरना में पराली से स्ट्रा बेलर तैयार कराते किसान राहुल चौहान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रदूषण की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके पीछे प्रमुख कारण पराली जलाने को माना जा रहा है। पराली के जलाने से आसमान में धुएं की परत छा जाती है, जिससे हवा की गुणवत्ता बिगड़ रही है। एनसीआर में शामिल सोनीपत में हालात अलग नहीं हैं। सरकार के जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद पराली जलाने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। हालांकि कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो पराली जलाने की बजाय उसका प्रबंधन कर अन्य किसानों के लिए नजीर बन रहे हैं। उनमें से हरियाणा के सोनीपत के गांव अटेरना के किसान राहुल चौहान भी हैं, जिन्होंने अपने खेत की पराली को जलाने की बजाय उसका प्रबंधन कर लाखों की कमाई की है। राहुल चौहान का कहना है कि जब तक किसानों को पराली की उपयोगिता नहीं समझाई जाएगी, तब तक इसको जलाने का सिलसिला थमने वाला नहीं है। ऐसे में जब दिल्ली व एनसीआर प्रदूषण के कारण बेहाल है तो वह पराली के फायदे बताकर किसानों को लाभ पहुंचाने के साथ-साथ वातावरण को भी प्रदूषण रहित बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
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गांव अटेरना में किसान राहुल चौहान द्वारा तैयार की गई स्ट्रा बेलर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त पिता कंवल सिंह चौहान से ली प्रेरणा
अटेरना गांव के किसान राहुल चौहान ने पराली को समस्या मानने की बजाय उसे आमदनी का जरिया बना डाला। राहुल चौहान बताते हैं कि उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त पिता कंवल सिंह चौहान से प्रेरणा पाकर पराली का प्रबंधन करना शुरू किया था। वह करीब पांच साल से पराली का पूरी तरह से प्रबंधन कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने स्ट्रा बेलर बनाकर उसका मशरूम में प्रयोग करना शुरू किया, जिससे वह लाखों कमा रहे हैं। वह कहते हैं किसान पराली से स्ट्रा बेलर बनाकर उसे मशरूम में प्रयोग करने के साथ ही अन्य मशरूम उत्पादकों को बेचकर मुनाफा भी कमा सकते हैं। साथ ही किसान इसका खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को पराली की उपयोगिता अच्छी तरह समझाने की जरूरत है।
अटेरना गांव के किसान राहुल चौहान ने पराली को समस्या मानने की बजाय उसे आमदनी का जरिया बना डाला। राहुल चौहान बताते हैं कि उन्होंने पद्मश्री पुरस्कार प्राप्त पिता कंवल सिंह चौहान से प्रेरणा पाकर पराली का प्रबंधन करना शुरू किया था। वह करीब पांच साल से पराली का पूरी तरह से प्रबंधन कर रहे हैं। इसके लिए उन्होंने स्ट्रा बेलर बनाकर उसका मशरूम में प्रयोग करना शुरू किया, जिससे वह लाखों कमा रहे हैं। वह कहते हैं किसान पराली से स्ट्रा बेलर बनाकर उसे मशरूम में प्रयोग करने के साथ ही अन्य मशरूम उत्पादकों को बेचकर मुनाफा भी कमा सकते हैं। साथ ही किसान इसका खाद के रूप में प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को पराली की उपयोगिता अच्छी तरह समझाने की जरूरत है।
राहुल चौहान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन कामों में कर सकते हैं पराली का प्रयोग
किसानों को बताना होगा कि पराली जलाने की बजाय उसे खेत में ही खाद के रूप में प्रयोग कर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। पराली का प्रयोग पशुओं को चारे में, पशुओं के नीचे डालकर उससे जैविक खाद बनाने, खेतों में काटकर बिछाने से ज्यादा पैदावार लेने में, काटकर मिट्टी में मिलाकर खेतों में कार्बनिक तत्व बढ़ाने और मशरूम उगाने में आसानी से किया जा सकता है। यह हर रूप में किसानों को लाभ ही देगी।
किसानों को बताना होगा कि पराली जलाने की बजाय उसे खेत में ही खाद के रूप में प्रयोग कर अच्छी पैदावार ले सकते हैं। पराली का प्रयोग पशुओं को चारे में, पशुओं के नीचे डालकर उससे जैविक खाद बनाने, खेतों में काटकर बिछाने से ज्यादा पैदावार लेने में, काटकर मिट्टी में मिलाकर खेतों में कार्बनिक तत्व बढ़ाने और मशरूम उगाने में आसानी से किया जा सकता है। यह हर रूप में किसानों को लाभ ही देगी।
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मशरूम(फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
पराली की दीवार भी बना सकते हैं किसान
राहुल चौहान बताते हैं कि पराली की दीवार तक बनाई जा सकती है, जिससे बना भवन गर्मी व सर्दी के मौसम के अनुकूल रहता है। पराली से बने भवन में गर्मी के मौसम में गर्मी और सर्दी के मौसम में सर्दी से बचा जा सकता है। इसके लिए स्ट्रा बेलर बनाकर उनसे दीवार बना उसकी मिट्टी या प्लास्टर से लिपाई कर दीवार तैयार की जा सकती है।
राहुल चौहान बताते हैं कि पराली की दीवार तक बनाई जा सकती है, जिससे बना भवन गर्मी व सर्दी के मौसम के अनुकूल रहता है। पराली से बने भवन में गर्मी के मौसम में गर्मी और सर्दी के मौसम में सर्दी से बचा जा सकता है। इसके लिए स्ट्रा बेलर बनाकर उनसे दीवार बना उसकी मिट्टी या प्लास्टर से लिपाई कर दीवार तैयार की जा सकती है।