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हरियाणा: म्हारे चार लाडले बने खेल रत्न, आठ को अर्जुन तो चार को गुरु द्रोणाचार्य पुरस्कार

Sun, 14 Nov 2021 02:30 AM IST
भूपेंद्र सिंह रवींद्र कौशिक, अमर उजाला ब्यूरो, सोनीपत(हरियाणा)
रवींद्र कौशिक, अमर उजाला ब्यूरो, सोनीपत(हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Sun, 14 Nov 2021 02:30 AM IST
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Four players of Haryana got Khel Ratna
राष्ट्रपति से खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त करते नीरज चोपड़ा (बाएं ओर) और सुमित आंतिल (दाएं ओर)। - फोटो : सोशल मीडिया
खेलों में देश का नाम अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमकाने वाले प्रदेश हरियाणा के खिलाड़ियों का जलवा खेल पुरस्कारों में भी देखने को मिला। पहली बार म्हारे 12 खिलाड़ियों को एक साथ खेल रत्न व अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया है। साथ ही चार पूर्व प्रशिक्षकों को भी द्रोणाचार्य अवार्ड मिला है। पुरस्कार पाने वाले हरियाणा के 12 खिलाड़ियों व चार प्रशिक्षकों में 6 खिलाड़ी व एक प्रशिक्षक अकेले सोनीपत से हैं। इनमें भी तीन खिलाड़ियों ने खेल रत्न पाया है। एक साथ इतने राष्ट्रीय खेल पुरस्कार मिलने से राज्य के खेल प्रेमी भी गदगद हैं। खेल रत्न पाने वालों में सबसे पहला नाम नीरज चोपड़ा का है। पानीपत के गांव खंदरा के इस लाडले ने जेवलियन थ्रो में पहली बार स्वर्ण पदक जीत कर पूरे देश को गौरवान्वित किया था। वहीं, सोनीपत के नाहरी के लाडले रवि दहिया ने कुश्ती में रजत पदक जीता था। इसके अलावा पैरालंपिक में स्वर्ण जीतने वाले खेवड़ा गांव के सुमित आंतिल व पैरालंपिक निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतने वाले कथूरा के मनीष नरवाल को भी खेल रत्न से नवाजा गया है।
Four players of Haryana got Khel Ratna
राष्ट्रपति से खेल रत्न पुरस्कार प्राप्त करते रवि दहिया (बाएं ओर) और मनीष नरवाल(दाएं ओर)। - फोटो : सोशल मीडिया
ये बने खेल रत्न
नीरज चोपड़ा : टोक्यो ओलंपिक के बाद दुनिया भर में स्टार बन चुका नीरज चोपड़ा जेवलियन थ्रो में बादशाह साबित हुआ। उसने स्वर्ण पदक जीतकर तिरंगे का मान बढ़ाया। इससे पहले नीरज चोपड़ा ने 2018 में जकार्ता एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक, 2017 में एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर जीता था। 

रवि दहिया : टोक्यो ओलंपिक से अचानक सुर्खियों में आए रवि दहिया पहले भी संघर्ष का बड़ा उदाहरण रहे हैं। सोनीपत के गांव नाहरी के छोरे ने 57 किलोग्राम भार वर्ग में टोक्यो में देश को रजत दिलाया। इससे पहले विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य, एशियन रेसलिंग चैंपियनशिप में दो बार स्वर्ण पदक जीत चुके हैं।

सुमित आंतिल : तीसरा खेल रत्न गांव खेवड़ा के पैरालंपियन सुमित आंतिल को मिला। टोक्यो पैरालंपिक में उसने नीरज चोपड़ा की सफलता को दोहराया और देश को एक बार फिर से गौरवान्वित होने का मौका दिया। टोक्यो में स्वर्ण पदक जीतने से पहले सुमित ने एशियन चैंपियनशिप, विश्व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन किया था।

मनीष नरवाल : फिलहाल फरीदाबाद में रहने वाले मनीष नरवाल मूलरूप से सोनीपत के गांव कथूरा के रहने वाले हैं। मनीष ने टोक्यो पैरालंपिक में निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। अपने इवेंट में वह दुनिया में चौथे नंबर के खिलाड़ी रहे हैं।
Four players of Haryana got Khel Ratna
राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करते योगेश (बाएं ओर) और संदीप नरवाल(दाएं ओर)। - फोटो : सोशल मीडिया
ये बने अर्जुन अवार्डी
सुरेंद्र पालड़ : हॉकी टीम के अहम सदस्य रहे सुरेंद्र पालड़ ने 6 साल की उम्र में हॉकी खेलना शुरू कर दिया था। टोक्यो में कांस्य पदक जीतने वाली टीम के सदस्य सुरेंद्र पालड़ हॉकी खेलने के लिए करनाल से कुरूक्षेत्र में जाकर रहने लगे थे। 

सुमित कुमार : सुमित भी सोनीपत के गांव कुराड़ के रहने वाले हैं। उन्होंने जीवनभर संघर्ष कर खुद को हॉकी के लिए तपाया और और उसके लाजवाब प्रदर्शन से हॉकी में भारतीय टीम ने कई बार बड़ी जीत दर्ज की हैं। जूनियर विश्व कप में अपने प्रदर्शन के कारण सुमित सुर्खियों में आया था।

योगेश कथूनिया : बहादुरगढ़ निवासी योगेश कथूनिया ने पैरालंपिक के एथलेटिक्स में रजत पदक जीता था। डिस्कस थ्रो में योगेश ने इससे पहले भी कई कीर्तिमान स्थापित किए थे। विश्व चैंपियनशिप में भी वह कमाल दिखा चुके हैं। योगेश को राष्ट्रपति अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया है।

मोनिका मलिक : सोनीपत के गोहाना निवासी मोनिका मलिक को अर्जुन अवार्ड मिला है। वह हॉकी उस टीम की खिलाड़ी हैं जिसने टोक्यो में भले ही पदक नहीं जीता परंतु अपने प्रदर्शन से सभी का दिल जरूर जीत लिया था। 
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Four players of Haryana got Khel Ratna
राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करते सज्जन सिंह (बाएं ओर) और सरकार तलवाड़(दाएं ओर)। - फोटो : सोशल मीडिया
संदीप नरवाल : सोनीपत का कबड्डी खिलाड़ी संदीप नरवाल कबड्डी लीग से सुखिर्यों में आया। वह जानदार खिलाड़ी है, जिसे कबड्डी का रविंद्र जडेजा भी कहा जाता है। संदीप को कबड्डी में शानदार प्रदर्शन के कारण अर्जुन अवार्ड मिला है।

हरविंद्र सिंह : कैथल निवासी पैरा तीरंदाज खिलाड़ी हरविंद्र ने टोक्यो में कांस्य पदक जीतकर शानदार प्रदर्शन किया था। इससे पहले भी वह कई बार अपने प्रदर्शन से अचंभित कर चुका है।

दीपक पूनिया : झज्जर के गांव छारा निवासी दीपक टोक्यो में पदक से चूक गए थे, लेकिन चौथे स्थान पर रहकर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया था। इससे पहले दीपक विश्व चैंपियनशिप में रजत पदक जीत चुके हैं। इसके अलावा अनेक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते हैं।
 
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Four players of Haryana got Khel Ratna
राष्ट्रपति से पुरस्कार प्राप्त करते मोनिका(बाएं ओर) और दीपक पुनिया(दाएं ओर)। - फोटो : सोशल मीडिया
सिंहराज अधाना : फरीदाबाद निवासी सिंहराज ने टोक्यो पैरालंपिक में दो पदक जीते थे। 50 मीटर पिस्टल व 10 मीटर पिस्टल में उसने यह कारनामा कर दिखाया था।

इन्हें मिला द्रोणाचार्य अवार्ड 
प्रीतम सिवाच :
सोनीपत की रहने वालीी भारतीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान एवं कोच प्रीतम सिवाच को द्रोणाचार्य अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। प्रीतम ने सोनीपत के औद्योगिक क्षेत्र स्थित हॉकी मैदान पर लड़कियों को हॉकी के गुर सिखाकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया है। प्रीतम सिवाच से हॉकी के गुर सीख नेहा गोयल, निशा वारसी व शर्मिला टोक्यो ओलंपिक में भले ही देश के लिए पदक जीतने से चूक  गईं लेकिन उन्होंने अपने खेल से महिला हॉकी में नई जान फूंकी है। प्रीतम के पास अभी भी करीब 200 लड़कियां हॉकी के गुर सीख रहीं हैं। वह 18 वर्षों से महिला हॉकी खिलाडिय़ों की पौध तैयार कर रहे हैं।
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