गोरखपुर में कोरोना की संभावित तीसरी लहर से पहले विशेषज्ञ बच्चों को विटामिन-ए की खुराक पिलाने की सलाह दे रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. छेत्रपाल यादव ने बताया कि नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए पिलाने से बच्चों में संक्रमण की आशंका काफी कम हो जाती है। इससे इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ती है।
डॉक्टर की सलाह: कोरोना से लड़ने में मदद करेगा विटामिन 'ए', पांच साल तक के बच्चों के लिए है अनिवार्य
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यह वसा में घुलनशील विटामिन है और यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में भी मदद करता है। बताया कि सीएनएनएस की वर्ष 2016-18 की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में एक से चार वर्ष तक के 16.9 प्रतिशत बच्चे विटामिन-ए की कमी से ग्रस्त हैं।
विटामिन-ए की कमी से नुकसान
एनीमिया, रोग प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होना, आंखों की रोशनी कम होना, अंधापन होना, आंखों में आंसू न बनना, त्वचा रूखी हो जाना और मुंह में छाले, दस्त जैसी समस्या होना।
इस तरह पिलाई जाती है विटामिन-ए की खुराक
नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों विटामिन-ए की खुराक दी जाती है। नौ से 12 माह तक के बच्चों को नियमित टीकाकरण के दौरान एमआर के प्रथम टीके के साथ एक मिलीलीटर (एमएल) विटामिन ए की खुराक पिलाई जाती है। जबकि 16 माह से 24 माह के बच्चों को एमआर के दूसरे टीके के साथ दो एमएल की खुराक देनी होती है। हर छह माह पर बाल स्वास्थ्य पोषण माह के दौरान दो वर्ष से पांच वर्ष तक के बच्चों को दो एमएल विटामिन ए पिलाया जाता है।
जिले में छह माह तक के करीब छह लाख बच्चे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इन बच्चों का हर हाल में नियमित टीकाकरण कराएं। टीका लगवाने से कई संक्रामक बीमारियों का खतरा खत्म हो जाता है। साथ ही कोविड से भी बचाव हो सकेगा। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एनके पांडेय ने कहा कि बाल स्वास्थ्य पोषण माह 28 जुलाई से शुरू हो चुका है। इस अभियान के तहत आशा/स्वास्थ्य कार्यकर्ता को नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन-ए की खुराक देने का निर्देश दिया गया है।