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Exclusive: अमेरिका की लैब में लकवे की दवा की खोज करेंगे 'किसान के बेटे' डॉ. राजकिशोर

Thu, 05 Aug 2021 04:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 05 Aug 2021 04:05 PM IST
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Farmer son Dr Rajkishore will discover paralysis medicine in America lab
माता-पिता के साथ डॉ. राजकिशोर निषाद। - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर शहर के युवा वैज्ञानिक डॉ. राजकिशोर निषाद लकवे की दवा की खोज अमेरिका की राइस यूनिवर्सिटी की लैब में करेंगे। उनके शोधपत्र के आधार पर राइस यूनिवर्सिटी, अमेरिका ने उन्हें अपनी लैब में शोध करने के लिए तीन साल की फेलोशिप दी है। इस दौरान उन्हें प्रतिमाह तीन लाख रुपये भी मिलेंगे। डॉ. राजकिशोर 31 जुलाई को अमेरिका पहुंचकर अपना काम भी शुरू कर चुके हैं।



झरवां, बड़गों निवासी किसान रुद्रनाथ निषाद के बड़े बेटे डॉ. राजकिशोर निषाद को लकवे की दवा की खोज की प्रेरणा उनके गांव व आसपास के इलाकों से मिली। उनके कई जानने वाले भी इस बीमारी के शिकार थे और उनकी जान चली गई। डॉ. राजकिशोर ने कक्षा 12 वीं तक की पढ़ाई राजकीय जुबिली इंटर कॉलेज से और बैचलर ऑफ साइंस (बीएससी) सेंट एंड्रयूज कॉलेज से की। बाद में मास्टर ऑफ साइंस (एमएससी) और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) करने के लिए वे हैदराबाद यूनिवर्सिटी, तेलंगाना चले गए। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी खबर...

Farmer son Dr Rajkishore will discover paralysis medicine in America lab
डॉ. राजकिशोर निषाद। - फोटो : अमर उजाला।

मधुमेह गुर्दे को कैसे प्रभावित करता है, उन्होंने इस विषय पर शोध किया। फरवरी 2021 में पीएचडी पूरी कर ली। उनके 10 से अधिक शोधपत्र अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं नेचर, जर्नल ऑफ बायोकैमिस्ट्री, फ्रंटियर्स इन मेडिसिन में प्रकाशित हो चुके हैं। डॉ. राजकिशोर की मां फुलेंदी देवी गृहिणी हैं और छोटे भाई पंकज निषाद की आभूषण की दुकान है। बड़ी बहन सुमंगला की शादी हो चुकी है।
 

Farmer son Dr Rajkishore will discover paralysis medicine in America lab
डॉ. राजकिशोर निषाद। - फोटो : अमर उजाला।

...जब पिता ने कहा- पढ़ाई छोड़ो, नौकरी करो
डॉ. राजकिशोर की कहानी बड़ी दिलचस्प है। शुरुआती दिनों में उनका मन पढ़ाई में नहीं लगता था। इंटरमीडिएट में सेकेंड डिवीजन पास हुए तो पिता ने दो टूक कह दिया- जाकर कहीं नौकरी करो। यहीं से डॉ. राजकिशोर का मन बदला और उन्होंने मेहनत का संकल्प लिया।

 

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डॉ. राजकिशोर निषाद। - फोटो : अमर उजाला।

सेंट एंड्रयूज कॉलेज में बीएससी प्रथम वर्ष में उन्होंने 60 प्रतिशत व द्वितीय वर्ष में 64 प्रतिशत अंक हासिल किए। तृतीय वर्ष की परीक्षा से पहले उनके क्लास के ही कुछ छात्रों से उनका विवाद हो गया और उनकी पिटाई कर दी गई।

 

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डॉ. राजकिशोर निषाद। - फोटो : अमर उजाला।

किसी तरह उन्होंने परीक्षा दी और प्रथम श्रेणी में पास की। इसके बाद एमएससी में प्रवेश की तैयारी के लिए पूरी ताकत झोंक दी। जेएनयू और हैदराबाद यूनिवर्सिटी की मेरिट लिस्ट में उनका नाम आया था।

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