गोरखपुर में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए बूस्टर डोज लगवाने में 387 रुपये आ रहे आड़े हैं। पैसे देकर अधिकतर लोग बूस्टर डोज लगवाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। जबकि जिन लोगों को दूसरी डोज लगवाए नौ माह बीत गए हैं, उन्हें बूस्टर डोज जरूर लगवानी चाहिए। बता दें कि कोरोना की चौथी लहर की आशंका को देखते हुए शासन ने बूस्टर डोज लगवाने की अनुमति 18 से 59 वर्ष के लोगों को दी है।
गोरखपुर: बूस्टर डोज लगवाने में 387 रुपये आ रहे आड़े, तीन निजी अस्पतालों में लगाई जा रही वैक्सीन
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शहर के तीन निजी अस्पतालों में लग रही बूस्टर डोज
स्वास्थ्य विभाग ने बूस्टर डोज लगाने के लिए पांच अस्पतालों को पंजीकृत किया है। इनमें से तीन अस्पतालों शाही ग्लोबल हॉस्पिटल तारामंडल, अपोलो बेतियाहाता और फातिमा अस्पताल पादरी बाजार में बूस्टर डोज लग रही है। दो अस्पतालों में अभी वैक्सीन नहीं लगाई जा रही है।
हेल्थ वर्कर और 60 वर्ष से ऊपर के लोग निशुल्क लगवा सकते हैं बूस्टर डोज
सीएमओ ने बताया कि हेल्थ वर्कर, फ्रंटलाइन वर्कर और 60 वर्ष से ऊपर के लोग किसी भी बूथ पर निशुल्क बूस्टर डोज लगवा सकते हैं। जिन लोगों का दूसरी डोज लगे नौ माह पूरा हो गया है, उन्हें बूस्टर डोज जरूर लगवानी चाहिए।
एक नजर बूस्टर डोज के आंकड़ों पर
बूस्टर डोज के पात्र : 4,97,909
इतने को लगी : 72,375, कुल प्रतिशत : 15.54
60 वर्ष से ऊपर : 30,113 व 18 से 44 वर्ष : 309
45 से 59 वर्ष : 548
स्वास्थ्य कर्मी : 41,424
कुल टीकाकरण : 72,14,629
पहली डोज : 39,50,117
दूसरी डोज : 39,91,410
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने कहा कि 18 से 59 वर्ष तक के लोग बूस्टर डोज लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। इस आयु वर्ग के लोगों को बूस्टर डोज लगवाने के लिए 387 रुपये शुल्क शासन ने निर्धारित किया है। अपील है कि जिन लोगों का समय पूरा हो चुका है वह बूस्टर डोज जरूर लगवाएं।