उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां अपनों की मिलीभगत से तहसील कर्मियों द्वारा सरकारी अभिलेखों में ‘कत्ल’ कर दिए गए भक्साफाफी गांव के रामकृष्ण हरिदास, घूम-घूमकर सरकारी अधिकारियों को अपने जिंदा होने का सुबूत दे रहे हैं, मगर कोई सुनने को तैयार नहीं। वे बेहाल, कहते हैं, अब योगी बाबा का सहारा है, हम मंदिर में जाकर गुहार करेंगे, कोई नहीं सुन रहा, योगी जी सुनो! हम जिंदा हैं। ऐसे ही 72 वर्षीय जियाऊ के ‘कत्ल’ के मामले में जांच तो शुरू हो गई है, मगर वो कब जिंदा हो पाएंगे और कब ‘कातिल’ दंड पाएंगे पता नहीं।
योगी जी सुनो! हम जिंदा हैं: अपनों की मिलीभगत से कागजों में 'कत्ल' कर दिए गए दो लोग, अब लगा रहे हैं गुहार
- सहजनवां तहसील के अभिलेखों में मृत घोषित किए गए दो लोग जिंदा होने का दे रहे सुबूत
- दोनों बुजुर्ग की जमीन दूसरे के नाम कर दी गई, न्याय के लिए लगा रहे तहसील के चक्कर
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पाली ब्लॉक के 50 वर्षीय रामकृष्ण हरिदास का नाम भूमि की खतौनी में दर्ज था। फरवरी 2020 में उन्होंने खतौनी निकलवाई, तब पता चला कि राजस्व रिकार्डों में उन्हें 12 दिसंबर 2015 को मृत घोषित कर उनके हिस्से की जमीन दूसरे के नाम कर दी गई। रामकृष्ण हरिदास ने जब अपना इंतखाब निकलवाया तो उस नंबर पर उनका नाम नहीं था। उनकी जगह दूसरे का नाम दर्ज कर दिया गया था और रिपोर्ट लगा दी गई थी कि रामकृष्ण की मौत हो चुकी है। अब रामकृष्ण हरिदास खुद को जिंदा साबित करने के लिए महीनों से तहसील के चक्कर काट रहे हैं। बृहस्पतिवार को उन्होंने तहसीलदार शशिभूषण पाठक को प्रार्थनापत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है। रामकृष्ण के एक पुत्र अशोक कुमार यादव तथा एक पुत्री मनीषा (अविवाहित) हैं।
इससे पहले, मुस्तफाबाद उर्फ मलउर गांव के जियाऊ पाल (72) का मामला सामने आ चुका है। 12 वर्ष पूर्व तत्कालीन लेखपाल द्वारा उन्हें मृत घोषित कर चौथी नामक व्यक्ति के नाम उनकी संपत्ति कर दी गई। इसकी जानकारी उन्हें तब हुई, जब करीब एक वर्ष पूर्व किसान सम्मान निधि की राशि आई। खुद को जिंदा करवाने के लिए वह वर्षों से तहसील के चक्कर काट रहे हैं। जियाऊ के दो पुत्र राम किशनपाल, होमगार्ड हैं और बृजेश पाल, बाहर काम करते हैं। मामला उजागर होने पर तहसील प्रशासन जागा और पीड़ित के प्रार्थनापत्र के आधार पर वाद दाखिल कर जांच टीम गठित की है।
सहजनवां तहसील कार्यालय आरके बाबू पीयूष ने कहा कि हमारे पास राजस्व कर्मचारियों का पुराना लेख-जोखा मौजूद नहीं है। पूर्व में तैनात रहे आरके बाबू द्वारा राजस्व कर्मियों के संबंध में कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
सहजनवां तहसीलदार शशि भूषण पाठक ने कहा कि राजस्वकर्मियों के लेखा-जोखा से संबंधित रजिस्टर न मिलना दुर्भाग्यपूर्ण है। मामले की जांच की जाएगी।