इसे गोरखनाथ बाबा का चमत्कार कहें या गोरखपुर पुलिस की चुस्ती-मुस्तैदी। हजारों की भीड़ में मां से बिछड़ी एक तीन साल की बच्ची के आंसू ज्यादा देर तक नहीं बहे। उसे दोबारा मां का आंचल नसीब हो गया था। इसके पीछे एक अद्भुत संयोग भी रहा, जिसके बारे में सुनते ही उसकी मां के भी होश उड़ गए, लेकिन उसे उनकी बच्ची खुशी सही सलामत मिल गई थी।
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नव वर्ष पर गोरखनाथ मंदिर में मकरसंक्रांति जैसा नजारा
- फोटो : अमर उजाला
दरअसल, नव वर्ष पर गोरखनाथ मंदिर में मकरसंक्रांति जैसा नजारा दिख रहा था। फर्क इतना था कि नए साल पर लोग गुरु गोरखनाथ का दर्शन कतारबद्ध होकर कर रहे थे वहीं माला व लड्डू चढ़ा रहे थे, जबकि मकरसंक्रांति में लोग यहां खिचड़ी चढ़ाते हैं। सर्वाधिक संख्या युवाओं की रही। उन्होंने मंदिर में सेल्फी भी ली। भीम सरोवर में लोगों ने बोटिंग का आनंद लिया।
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नव वर्ष पर गोरखनाथ मंदिर में मकरसंक्रांति जैसा नजारा
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हर वर्ग के लोग नए साल के जश्न के लिए यहां पहुंचे थे। इसमें युवाओं के अलावा अन्य लोग भी परिवार समेत मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने कहा कि सुबह से ही भीड़ मंदिर में आने लगी थी। मंदिर के बाहर से ही पुलिस के जवानों ने श्रद्धालुओं को कतार में लगवाया। लंबी कतार लगी थी। जांच के बाद ही श्रद्धालुओं को मंदिर में जाने दिया गया।
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नव वर्ष पर गोरखनाथ मंदिर में मकरसंक्रांति जैसा नजारा
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इतनी भीड़ के दौरान कई बच्चे अपने परिवार से बिछड़ गए तो पुलिस ने उन्हें मिलाया। तीन साल की खुशी भी मेले में अपनी मां से बिछड़ गई थी। चौकी पर मेले की व्यवस्था में लगे अजय सिंह के पास कोई उसे लेकर गया। गनीमत रही कि खुशी को उसके पिता का मोबाइल नंबर याद था। फिर हेड कांस्टेबल अजय ने खुशी के पिता से संपर्क कर उसे मां के पास पहुंचाया।
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नव वर्ष पर गोरखनाथ मंदिर में मकरसंक्रांति जैसा नजारा
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गोरखनाथ मंदिर में कई एकड़ में मेले की व्यवस्था की गई है। यहां दूर-दूर से आकर लोग अपनी दुकान लगाए हुए हैं। दर्जनों झूला, चर्खी, ब्रेक डांस, मौत का कुआं सहित अन्य कई मनोरंजन के साधन मेले में हैं। वहां पर कई सौ दुकानें लगाई गई हैं। परिसर में इस कदर भीड़ थी कि लोगों का चलना मुश्किल था। हर साल की अपेक्षा इसबार ज्यादा भीड़ थी।