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तीन किशोरों ने मिलकर अपनी 'पॉकेट मनी' से बनाई ऐसी पाठशाला, बिना शिक्षक के ही हो रही पढ़ाई
Mon, 09 Nov 2020 05:22 PM IST
vivek shukla
विनोद कुमार मिश्र, गौरीबाजार (देवरिया)।
विनोद कुमार मिश्र, गौरीबाजार (देवरिया)।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 09 Nov 2020 05:22 PM IST
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नौनिहालों की तकदीर लिख रहे गांव के तीन किशोर।
- फोटो : अमर उजाला।
कोरोना काल में विद्यालय से दूर रहे गरीब बच्चों की तकदीर तीन किशोर बदल रहे हैं। चार माह से प्रतिदिन पाठशाला चलाकर यह किशोर बच्चों को गणित, अंग्रेजी, हिंदी सहित कंप्यूटर की शिक्षा दे रहे हैं। इनके इस प्रयास को प्राथमिक विद्यालय करौना की एक शिक्षिका ने एक नई ऊंचाई दी। गरीब बच्चों को जहां कॉपी, पेंसिल, रबर, कटर, पेन उपलब्ध कराया, वहीं उनके बैठने के लिए चटाई की व्यवस्था कर दी। साथ ही संक्रमण से बचाव के लिए मास्क भी वितरित किया गया।
अस्थाई पाठशाला में मौजूद बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला।
कोरोना से पिछले आठ माह से विद्यालय बंद चल रहे हैं। ऐसे में गौरी बाजार क्षेत्र के ग्राम देवगांव के गरीब बच्चों को इधर-उधर घूमते देख गांव के ही तीन किशोर जो कि स्वयं छात्र भी हैं, उनके मन में नौनिहालों की तकदीर संवारने की भावना जागृत हुई। बच्चों को एकत्रित कर बस्ती से सटे मंदिर परिसर में उन्हें पढ़ाना शुरू कर दिया। यह देख गांव के ही कुछ लोग इन किशोरों को प्रोत्साहित करने लगे। देखते ही देखते इस पाठशाला में बच्चों की संख्या सौ से भी अधिक हो गई। संसाधन के अभाव में किसी तरह अपनी पॉकेटमनी से एक ब्लैक बोर्ड खरीदकर पठन-पाठन शरू कर दिए, जो अभी तक जारी है। बैठने के लिए चट्टी, बोरा लेकर घर से बच्चे सुबह 10 बजे पहुंचते हैं और दोपहर दो बजे तक पढ़ते हैं। इस बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन भी कराया जाता।
अस्थाई पाठशाला में मौजूद बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला।
ऐसे शुरू हुई पाठशाला
स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र अविनाश ने गरीब बच्चों को इधर-उधर घूमते हुए देखा तो उनके मन में इन बच्चों को पढ़ाने की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने गांव के कक्षा-11 के छात्र सतीश कुमार एवं इंटरमीडिएट के बाद कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहे छात्र अनिल कुमार का सहयोग लिया। बाकायदा समय सारिणी बनाई गई। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को गणित, अंग्रेजी, हिंदी व कंप्यूटर की शिक्षा दी जाने लगी। जुलाई माह से अब तक यह पाठशाला निरंतर चल रही है। गांव की रसोइयों द्वारा जब यह बात प्राथमिक विद्यालय करौना की सहायक शिक्षिका सुभागिता पांडेय को पता चली तो वह बस्ती पहुंच गईं। उन्होंने किशोरों के प्रयास की सराहना करते हुए सभी बच्चों में मास्क तथा सैनिटाइजर का वितरण किया। साथ ही संसाधन से जूझ रहे नौनिहालों के बैठने के लिए अपने स्तर से मैट सहित कॉपी, पेन, पेंसिल, कटर, रबर सहित अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए। गांव के विकास कुमार एवं संतोष कुमार राही ने बताया कि गांव के इन तीन किशोरों ने यह महान कार्य कर पूरे बस्ती को रोमांचित कर दिया है।
स्नातक द्वितीय वर्ष के छात्र अविनाश ने गरीब बच्चों को इधर-उधर घूमते हुए देखा तो उनके मन में इन बच्चों को पढ़ाने की इच्छा जागृत हुई। उन्होंने गांव के कक्षा-11 के छात्र सतीश कुमार एवं इंटरमीडिएट के बाद कंप्यूटर की पढ़ाई कर रहे छात्र अनिल कुमार का सहयोग लिया। बाकायदा समय सारिणी बनाई गई। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को गणित, अंग्रेजी, हिंदी व कंप्यूटर की शिक्षा दी जाने लगी। जुलाई माह से अब तक यह पाठशाला निरंतर चल रही है। गांव की रसोइयों द्वारा जब यह बात प्राथमिक विद्यालय करौना की सहायक शिक्षिका सुभागिता पांडेय को पता चली तो वह बस्ती पहुंच गईं। उन्होंने किशोरों के प्रयास की सराहना करते हुए सभी बच्चों में मास्क तथा सैनिटाइजर का वितरण किया। साथ ही संसाधन से जूझ रहे नौनिहालों के बैठने के लिए अपने स्तर से मैट सहित कॉपी, पेन, पेंसिल, कटर, रबर सहित अन्य संसाधन भी उपलब्ध कराए। गांव के विकास कुमार एवं संतोष कुमार राही ने बताया कि गांव के इन तीन किशोरों ने यह महान कार्य कर पूरे बस्ती को रोमांचित कर दिया है।
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अस्थाई पाठशाला में मौजूद बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला।
पाठशाला में गूंजता है वैदिक मंत्र
देवगांव की इस बस्ती के पाठशाला में प्रतिदिन वैदिक मंत्र गूंजते हैं। गायत्री मंत्र से जहां पाठशाला की शुरुआत होती है। वहीं त्वमेव माता च पिता त्वमेव से पाठशाला प्रतिदिन बंद होती है। बीच में मां सरस्वती की भी वंदना की जाती है। किशोर शिक्षक अविनाश, सतीश एवं अनिल कुमार ने बताया कि वे नौनिहालों के साथ प्रतिदिन गायत्री मंत्र का पांच बार सामूहिक जप करते हैं।
देवगांव की इस बस्ती के पाठशाला में प्रतिदिन वैदिक मंत्र गूंजते हैं। गायत्री मंत्र से जहां पाठशाला की शुरुआत होती है। वहीं त्वमेव माता च पिता त्वमेव से पाठशाला प्रतिदिन बंद होती है। बीच में मां सरस्वती की भी वंदना की जाती है। किशोर शिक्षक अविनाश, सतीश एवं अनिल कुमार ने बताया कि वे नौनिहालों के साथ प्रतिदिन गायत्री मंत्र का पांच बार सामूहिक जप करते हैं।
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किशोरों के इस प्रयास को एक शिक्षिका ने दी नई ऊंचाई।
- फोटो : अमर उजाला।
बीईओ ने किशोरों को किया सम्मानित
गौरी बाजार विकास खंड क्षेत्र के बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र को जब किशोरों द्वारा पाठशाला चलाने की जानकारी मिली तो वे भी बस्ती पहुंच किशोरों सहित शिक्षिका को सम्मानित किया। बीईओ ने कहा कि यह अच्छी पहल है। उच्चाधिकारियों के माध्यम से इन किशोरों को प्रमाण पत्र भी दिलाया जाएगा।
गौरी बाजार विकास खंड क्षेत्र के बीईओ ज्ञानचंद्र मिश्र को जब किशोरों द्वारा पाठशाला चलाने की जानकारी मिली तो वे भी बस्ती पहुंच किशोरों सहित शिक्षिका को सम्मानित किया। बीईओ ने कहा कि यह अच्छी पहल है। उच्चाधिकारियों के माध्यम से इन किशोरों को प्रमाण पत्र भी दिलाया जाएगा।