एक दशक पहले तक गोरखपुर में पर्यटन का दायरा केवल गोरखनाथ मंदिर तक सीमित था। लेकिन तीन साल पहले गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की कमान संभाली तो गोरखपुर का पर्यटन उद्योग भी उत्साहित हुआ। सरकार ने न केवल लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़ी फाइलों को निकाला बल्कि नए सिरे से मौजूदा परिस्थितियों के मुताबिक नई योजना तैयार कर उसपर काम भी शुरू हुआ। इसी का नतीजा है कि आज पर्यटन विभाग पर्यटकों को गोरखपुर में कुछ दिन रोकने में सफल हो रहा है।
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तीन साल में 'टूरिस्ट हब' बनकर उभरा गोरखपुर, तस्वीरों में देखें ऐसे बदल गया शहर का नक्शा
Sun, 19 Apr 2020 01:48 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 19 Apr 2020 01:48 PM IST
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लाइट एंड साउंड शो
- फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर और आसपास के ये केंद्र कर रहे आकर्षित
गोरखपुर - गोरखनाथ मंदिर और यहां का लाइट एंड साउंड शो, गीता प्रेस, गीता वाटिका, रामगढ़ताल और यहां का लाइट एंड साउंड शो, इमामबाड़ा, जटाशंकर गुरुद्वारा, तरकुलहा देवी, बुढ़िया माई, विनोद बन, झारखंडी मंदिर, मुक्तेश्वरनाथ मंदिर, मुंजेश्वरनाथ मंदिर, सूरजकुंड धाम, मानसरोवर, मंडलीय कारागार स्थित बिस्मिल का शहीदी स्थल, डोहरिया कला, चौरीचौरा शहीद स्मारक, भरोहिया शिव
मंदिर
कुशीनगर - निर्वाणा मंदिर, रामाभार स्तूप, चीन मंदिर, श्रीलंका मंदिर, जापान मंदिर, थाई मंदिर, सूर्य मंदिर।
महराजगंज - लहड़ादेवी, सोहगीबरवा वन अभ्यारण्य, चौक बाजार स्थित गोरक्षनाथ मंदिर
देवरिया - दुग्धेश्वरनाथ मंदिर, नींबेश्वरनाथ मंदिर, देवरहा बाबा
सिद्धार्थनगर - कपिलवस्तु
गोरखपुर - गोरखनाथ मंदिर और यहां का लाइट एंड साउंड शो, गीता प्रेस, गीता वाटिका, रामगढ़ताल और यहां का लाइट एंड साउंड शो, इमामबाड़ा, जटाशंकर गुरुद्वारा, तरकुलहा देवी, बुढ़िया माई, विनोद बन, झारखंडी मंदिर, मुक्तेश्वरनाथ मंदिर, मुंजेश्वरनाथ मंदिर, सूरजकुंड धाम, मानसरोवर, मंडलीय कारागार स्थित बिस्मिल का शहीदी स्थल, डोहरिया कला, चौरीचौरा शहीद स्मारक, भरोहिया शिव
मंदिर
कुशीनगर - निर्वाणा मंदिर, रामाभार स्तूप, चीन मंदिर, श्रीलंका मंदिर, जापान मंदिर, थाई मंदिर, सूर्य मंदिर।
महराजगंज - लहड़ादेवी, सोहगीबरवा वन अभ्यारण्य, चौक बाजार स्थित गोरक्षनाथ मंदिर
देवरिया - दुग्धेश्वरनाथ मंदिर, नींबेश्वरनाथ मंदिर, देवरहा बाबा
सिद्धार्थनगर - कपिलवस्तु
रामगढ़ ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
मरीन ड्राइव सा हुआ रामगढ़ताल का नजारा
वर्षों तक दुर्दशा का दंश झेल चुका रामगढ़ ताल इन दिनों पर्यटकों को मुंबई के मरीन ड्राइव सी अनुभूति दे रहा है। ताल के तट पर बना खूबसूरत नौकायन केंद्र लोगों को रोमांचित कर रहा है। वहीं शाम होते भव्य गोरखपुर का इतिहास दिखाने वाला 40 मिनट का लाइट एंड साउंड शो लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
वर्षों तक दुर्दशा का दंश झेल चुका रामगढ़ ताल इन दिनों पर्यटकों को मुंबई के मरीन ड्राइव सी अनुभूति दे रहा है। ताल के तट पर बना खूबसूरत नौकायन केंद्र लोगों को रोमांचित कर रहा है। वहीं शाम होते भव्य गोरखपुर का इतिहास दिखाने वाला 40 मिनट का लाइट एंड साउंड शो लोग काफी पसंद कर रहे हैं।
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ऐसा होगा वाटर स्पोर्ट्स काम्प्लेक्स।
- फोटो : अमर उजाला
अंतरराष्ट्रीय वाटर स्पोर्ट्स का मिलेगा मजा
रामगढ़ ताल बहुत जल्द गोरखपुर और आसपास के उन लोगों के लिए उपयोगी साबित होने वाला है जो वाटर स्पोर्ट्स का जुनून रखते हैं। 45 करोड़ की लागत से वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण शुरू हो चुका है। वाटर कांप्लेक्स में मनोरंजन के भरपूर इंतजाम होगा। वहीं वाटर स्पोर्ट्स के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी तैयार किए जाएंगे।
रामगढ़ ताल बहुत जल्द गोरखपुर और आसपास के उन लोगों के लिए उपयोगी साबित होने वाला है जो वाटर स्पोर्ट्स का जुनून रखते हैं। 45 करोड़ की लागत से वाटर स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का निर्माण शुरू हो चुका है। वाटर कांप्लेक्स में मनोरंजन के भरपूर इंतजाम होगा। वहीं वाटर स्पोर्ट्स के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी तैयार किए जाएंगे।
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निर्माणाधीन राजघाट।
- फोटो : अमर उजाला
संवारी जा रही आध्यात्मिक धरोहरें
गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे आध्यात्मिक स्थल जो प्रचार-प्रसार के अभाव में पर्यटकों का ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रहे थे। पर्यटन विभाग ने ऐसे सभी आध्यात्मिक स्थलों को चिह्नित करने और उन्हें चमकाने के लिए योजनाएं बनाई हैं। कुछ स्थानों पर काम शुरू भी हो गया है। इसके चयन में सभी धर्म-संप्रदाय की भावनाओं का पूरा ख्याल रखा गया है। ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च, जटाशंकर गुरुद्वारा और इमामबाड़े के लिए योजनाएं तैयार हो चुकी हैं।
गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में कई ऐसे आध्यात्मिक स्थल जो प्रचार-प्रसार के अभाव में पर्यटकों का ध्यान आकर्षित नहीं कर पा रहे थे। पर्यटन विभाग ने ऐसे सभी आध्यात्मिक स्थलों को चिह्नित करने और उन्हें चमकाने के लिए योजनाएं बनाई हैं। कुछ स्थानों पर काम शुरू भी हो गया है। इसके चयन में सभी धर्म-संप्रदाय की भावनाओं का पूरा ख्याल रखा गया है। ऐतिहासिक क्राइस्ट चर्च, जटाशंकर गुरुद्वारा और इमामबाड़े के लिए योजनाएं तैयार हो चुकी हैं।