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Sawan 2020: छह जुलाई से शुरू हो रहा है सावन का पवित्र महीना, हर दिन होता है खास, पूजन से मिलता है ये फल
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 04 Jul 2020 12:05 PM IST
सार
छह जुलाई से लग रहा है सावन मास
चंद्र के स्वामी भगवान शिव हैं सावन मास के देवता
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हिंदू धर्म के सबसे पवित्र महीनों में से एक सावन मास की शुरुआत छह जुलाई से हो रही है। ज्योतिषियों के अनुसार सावन के सोमवार को सोम या चंद्रवार भी कहते हैं। यह दिन भगवान शिव को अतिप्रिय है। सावन में मंगलवार को मंगलागौरी व्रत, बुधवार को बुध गणपति व्रत, बृहस्पतिवार को बृहस्पति देव व्रत, शुक्रवार को जीवंतिका व्रत, शनिवार को बजरंग बली व नृसिंह व्रत और रविवार को सूर्य व्रत होता है।
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सावन में शिव आराधना का है विशेष महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार हिंदू धर्म में सावन मास का विशेष महत्व है। इस मास की अपनी संस्कृति है। ज्येष्ठ के तीव्र ताप और आषाढ़ की उमस से क्लांत प्रकृति को अमृत वर्षा की दरकार होती है। सावन में श्रवण नक्षत्र तथा सोमवार से भगवान शिव का गहरा संबंध है। भगवान शिव ने स्वयं सनत्कुमार से कहा है मुझे बारह महीनों में सावन (श्रावण) विशेष प्रिय है। इसी काल में वे श्रीहरि के साथ मिलकर लीला करते हैं। इस मास की विशेषता है कि इसका कोई दिन व्रत शून्य नहीं देखा जाता है।
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इस महीने में गायत्री मंत्र, महामृत्युंजय मंत्र, शतरूद्र का पाठ और पुरुष सूक्त का पाठ एवं पंचाक्षर, षडाक्षर आदि शिव मंत्रों व नामों का जप विशेष फल देने वाला होता है। श्रावण मास का माहात्म्य सुनने अर्थात श्रवण हो जाने के कारण इसका नाम श्रावण हुआ। पूर्णिमा तिथि का श्रवण नक्षत्र से योग होने से भी इस मास का नाम श्रावण कहलाया है। यह सुनने मात्र से सिद्धि देने वाला है। श्रावण मास व श्रवण नक्षत्र के स्वामी चंद्र, और चंद्र के स्वामी भगवान शिव, सावन मास के अधिष्ठाता देवाधिदेव शिव ही हैं।
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मुक्तेश्वरनाथ मंदिर में शिवलिंग पर जल चढ़ाते श्रद्धालु।file
- फोटो : Shivharsh Dwivedi
पूजन से मिलता है ये फल
पंडित विजय शंकर पांडेय के अनुसार श्रावण में एक मास तक शिवालय में स्थापित, प्राण प्रतिष्ठित शिवलिंग या धातु से निर्मित लिंग अथवा नर्मदेश्वर शिव का गंगाजल व दुग्ध से रुद्राभिषेक करें, यह शिव को अत्यंत प्रिय हैं। कुशोदक से व्याधि शांति, जल से वर्षा, दधि से पशुधर्न, इंख के रस से लक्ष्मी, मधु से धन, दूध से एवं एक हजार मंत्रों सहित घी की धारा से पुत्र एवं वंश वृद्धि होती है।
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सावन में हर तिथियों के देवता
पंडित देवेंद्र प्रताप मिश्र के अनुसार श्रावण प्रतिपदा तिथि के देवता अग्नि, द्वितीया के ब्रह्मा, तृतीया के गौरी, चतुर्थी के गणनायक, पंचमी के नाग, षष्ठी के नाग, सप्तमी के सूर्य, अष्टमी के शिव, नवमी के दुर्गा, दशमी के यम, एकादशी के स्वामी विश्वदेव, द्वादशी के भगवान श्रीहरि, त्रयोदशी के कामदेव, चतुर्दशी के भगवान शिव, अमावास्या के पितर और पूर्णिमा के स्वामी चंद्रमा हैं।
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