देश की बेटी निर्भया को इंसाफ दिलाने में गोरखपुर के अधिवक्ता पुत्र व उसके दोस्त अवनींद्र की भूमिका बहुत अहम रही थी। आज ही के दिन एक साल पहले निर्भया के आरोपियों को फांसी हुई थी। निर्भया के इकलौते चश्मदीद गवाह दोस्त ने ना सिर्फ दोस्ती निभाई बल्कि आरोपियों को फांसी तक पहुंचाने में भी उसकी गवाही अहम कड़ी साबित हुई थी। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें पूरी कहानी...
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निर्भया के गुनहगारों को फांसी का एक साल: निर्भया के गुमनाम दोस्त की कहानी, जिसके बयान पर हुई थी फांसी
Sat, 20 Mar 2021 03:35 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 20 Mar 2021 03:35 PM IST
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बाएं निर्भया की मां, दाएं अवनींद्र। (File)
- फोटो : अमर उजाला।
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निर्भया के साथ मौके पर मौजूद दोस्त अवनींद्र
- फोटो : file
निर्भया का दोस्त अवनींद्र गुनहगारों को सजा दिलाने के लिए लड़ता रहा लेकिन वह अंदर ही अंदर टूट गया था। उसे खुद को संभालने में चार साल लग गए। वह बड़ी मुश्किल से इस सदमे से बाहर निकाला और अभी चार साल पहले उसके परिजनों ने उसकी शादी करा दी। अब वह तीन साल के बेटे और पत्नी के साथ एक प्राइवेट कंपनी में इंजीनियर के पद पर विदेश में कार्यरत है।
nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक 16 दिसंबर 2012 की रात निर्भया अपने दोस्त अधिवक्ता भानू प्रकाश पांडेय के पुत्र अवनींद्र के साथ बस से जा रही थी। इस दौरान दरिंदों ने ना सिर्फ उसे अपनी हवस का शिकार बनाया बल्कि दरिंदगी की सारी हदें पार कर दी। इस घटना ने अवनींद्र को अंदर से झकझोर दिया।
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निर्भया के दोषी
- फोटो : सोशल मीडिया
वह सदमे में चला गया। चश्मदीद गवाह के तौर पर सिर्फ वही मौजूद था जिसकी गवाही से दोषियों को सजा होती। काफी लंबे समय तक अवनींद्र ने गुमनामी की जिंदगी बिताई और अभी भी वही जिंदगी जी रहा है।
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nirbhaya case
- फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि निर्भया के चारों गुनहगारों अक्षय ठाकुर, मुकेश सिंह, विनय शर्मा और पवन गुप्ता की फांसी तीन बार टल गई थी। लंबे इंतजार के बाद 20 मार्च 2020 को निर्भया के गुनहगारों को फांसी पर लटका दिया गया था।