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तस्वीरें: यूपी के सबसे खूबसूरत चिड़ियाघर के वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों ने डाला डेरा, यहां देखें मनमोहक नजारा
Thu, 25 Nov 2021 12:47 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 25 Nov 2021 12:47 PM IST
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चिड़ियाघर के वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों ने डाला डेरा।
- फोटो : अमर उजाला।
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ठंड शुरू होने के साथ ही शहीद अशफाक उल्लाह खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) के वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों का कलरव सुनाई पड़ने लगा है। पिछले एक सप्ताह में लिटिल कारमोरेंट (जलकाग), व्हीस्लिंग डक, लेसर एडजूटेंट, नाइट हेरोन जैसे दुर्लभ पक्षी वेटलैंड में आ गए हैं। इनका आना प्रबंधन सुखद मान रहा है। उन्हें उम्मीद है कि आने वाले समय में ऐसे ही धीरे-धीरे अन्य प्रजातियों के पक्षियों से वेटलैंड गुलजार होगा।
गोरखपुर चिड़ियाघर के वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों ने डाला डेरा।
- फोटो : अमर उजाला।
पिछले एक सप्ताह में बड़ी संख्या में इंडियन माइग्रेटेड बर्ड (भारतीय विस्थापित पक्षी) इसमें उतर चुके हैं। वेटलैंड में उन्हें उनका भोजन मिल रहा है। चिड़ियाघर के बाहरी तरफ बड़ी ऊंची दीवारें होने से यह पूरी तरह सुरक्षित है।
गोरखपुर चिड़ियाघर के वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों ने डाला डेरा।
- फोटो : अमर उजाला।
प्राणि उद्यान के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि लेसर एडजुटेंट आम तौर पर अपनी सेहत के अनुकूल जलवायु में रहना पसंद करते हैं। वेटलैंड के पास घने और बड़े पेड़ हैं, ऐसे में लेसर एडजुटेंट ने इस इलाके को बसेरा बनाया है। ये संरक्षित घने वन क्षेत्रों में अधिक मिलते हैं। इससे उन्हें पर्याप्त भोजन भी मिल जाता है। उन्होंने बताया कि अभी वर्तमान समय में कॉमन कूट और व्हिल्सिंग डक पक्षी आ चुके हैं।
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गोरखपुर चिड़ियाघर के वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों ने डाला डेरा।
- फोटो : अमर उजाला।
कॉमन कूट- यह पक्षी अपने घोंसले में नहीं रहते हैं। दक्षिण एशिया क्षेत्र में इनकी प्रजाति पाई जाती हैं। दूसरे के घोंसलों में ही यह अंडे देते हैं। ऐसे ही इनका जीवन चक्र चलता है। डॉ. योगेश ने बताया कि यह पक्षी शेड्यूल दो में आते हैं। इनको पकड़ना वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत अपराध है।
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गोरखपुर चिड़ियाघर के वेटलैंड में प्रवासी पक्षियों ने डाला डेरा।
- फोटो : अमर उजाला
व्हिस्लिंग डक- हिंदी भाषा में इन्हें सिल्ही कहा जाता है। बतख की यह प्रजाति भारत के सभी हिस्सों में मिलती है। मौसम के अनुसार ही यह अपना भोजन भी करते हैं। वैसे इनका खास भोजन पानी में वनस्पति होता है। इनकी आवाज सीटी की तरह निकलती है, इसीलिए ही इन्हें व्हिस्लिंग डक कहा जाता है।