अंग्रेजों के शासन काल में बना श्रीनगर ताल का पुल उपेक्षा का शिकार हो गया है। दो विधान सभा के लोगों को जोड़ने वाला पुल आज अपनी दशा पर आंसू बहा रहा है। करीब तीन वर्ष से पुल टूटा हुआ है। नतीजा क्षेत्र के दर्जनों गांव के लोगों को अपना रास्ता बदलकर लंबी दूरी तय करना मजबूरी हो गई है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
तस्वीरें: ब्रिटिश हुकूमत में बना था ये 'श्रीनगर पुल', पानी रोकने के लिए लगे थे 12 फाटक
फरेंदा तहसील क्षेत्र के श्रीनगर गांव के पास अंग्रेजों के शासन काल में एक पुल का निर्माण कराया गया था। जिसकी लंबाई करीब 40 मीटर है। जिसमें 12 फाटक लगे हुए थे। बारिश के दिनों में ताल में पानी स्टोर करके लोगों के खेतों की सिंचाई होती थी।
पर्यटन की दृष्टि से भी श्रीनगर ताल का एक अलग महत्व था। जहां पर देश विदेश की पक्षियों का रैन बसेरा हुआ करता था। करीब तीन वर्ष पूर्व पुल का एक पीलर धंस गया तो सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पुल से आवागमन को बंद कर दिया था। जिसके निर्माण के लिए क्षेत्रीय नेताओं ने धरना प्रदर्शन किया लेकिन कुछ नहीं हुआ। उसके बाद 2017 में आखिरकार पुल टूट गया और रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया।
इससे क्षेत्र के लक्ष्मीपुर, रानीपुर, बृजमनगंज, कोल्हुई, चौतरवां, मध्यनगर, बैदोली, कुकरहवां, सुल्तानपुर, गुजरातपुर, इटहिया सहित अनेक गांवों के लोगों का रास्ता पूरी तरह से बंद हो गया। साथ ही किसानों के लिए सिंचाई का एक माध्यम भी ठप हो गया। फरेंदा विधायक बजरंग बहादुर सिंह ने बताया कि पुल को बनवाने के लिए प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए कारगर पहल हुई।
नौतनवां व फरेंदा के लिए अहम है पुल
क्षेत्रीय नागरिक रामकेवल सहानी का कहना है कि नौतनवां व फरेंदा विधान सभा को जोड़ने वाला पुल काफी महत्वपूर्ण है। इससे करीब 50 गांवों के लोगों को सहूलियत मिलेगी। साथ ही छात्रों को स्कूल जाने व मरीजों को शीघ्र अस्पताल पहुंचाने के लिए यह रास्ता विशेष महत्व रखता है। पुल न होने से लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है।