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Commonwealth Game: चार दशक से 'पन्ना' को कॉमनवेल्थ में सोने का इंतजार, 1978 में ठोकी थी ताल

Fri, 29 Jul 2022 07:02 AM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 29 Jul 2022 07:02 AM IST
सार

1978 में कनाडा के एडमिंटन में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 25 वर्ष के युवा पहलवान पन्नेलाल यादव(82 किलोभार) ने भी भाग लिया था। मैट पर उन्होंने आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के धुरंधर पहलवानों को धूल चटाकर न केवल गोरखपुर बल्कि देश का झंडा बुलंद किया था।

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Gorakhpur wrestler Pannelal Yadav had scored in Commonwealth 1978
पहलवान पन्नेलाल यादव। - फोटो : अमर उजाला।

अंतरराष्ट्रीय पहलवान पन्नेलाल यादव चार दशक से कॉमनवेल्थ गेम में गोरखपुर के पहलवानों से भी पदक की आस है। वर्ष 1978 में कनाडा के एडमिंटन में आयोजित हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 25 वर्ष के युवा पहलवान पन्नेलाल यादव(82 किलोभार) ने भी भाग लिया था। मैट पर उन्होंने आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के धुरंधर पहलवानों को धूल चटाकर न केवल गोरखपुर बल्कि देश का झंडा बुलंद किया था।



मगर, क्वार्टर फाइनल में कनाडा के पहलवान से भिड़ंत के दौरान घुटने में लगी चोट ने उनके साथ साथ गोरखपुरवासियों के कॉमनवेल्थ में पहले पदक की आस तोड़ दी। इसकी कसक आज भी उनके जहन में है। वह चाहते हैं कि गोरखपुर के पहलवानों का डंका भी कॉमनवेल्थ गेम्स में बजे। समय बदला, खेल की तकनीक बदली, सुविधा और संसाधन भी बदले, देश को पदक भी मिला मगर, कॉमनवेल्थ गेम्स में गोरखपुर के पदक की चाह आज तक पूरी नहीं हो सकी है।

 

Gorakhpur wrestler Pannelal Yadav had scored in Commonwealth 1978
कॉमनवेल्थ गेम्स में प्रतिद्वंद्वी से लड़ते पहलवान पन्नेलाल यादव। - फोटो : अमर उजाला।

पन्नेलाल यादव ने बताया कि चार दशक पहले इतनी सुविधाएं खिलाड़ियों को नहीं मिलती थी। प्रैक्टिस अखाड़ों और व्यायामशालाओं में मिट्टी पर होती थी। तब भी गोरखपुर के पहलवानों ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में अपनी चमक बिखेरी है। अब, सुविधा और संसाधन बढ़ गए हैं। केंद्र और राज्य सरकार संसाधनों को उपलब्ध करा रही है। विजेताओं को अच्छी धनराशि मिल रही। मगर इसके बावजूद हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की अपेक्षा हम पीछे हैं।
 

Gorakhpur wrestler Pannelal Yadav had scored in Commonwealth 1978
तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरार जी देसाई से हाथ मिलाते पहलवान पन्नेलाल यादव। - फोटो : अमर उजाला।

इसकी मूल वजह नौकरियों का अभाव है। मेरी सरकार से गुजारिश है कि वो सभी प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान हासिल करने वालों को नौकरी देने का एलान करे। इससे खिलाड़ियों और अभिभावकों की रूचि खेल में बढ़ेगी। स्कूलों में खेल को अनिवार्य कर दिया जाए।


 

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Gorakhpur wrestler Pannelal Yadav had scored in Commonwealth 1978
पहलवान पन्नेलाल यादव। - फोटो : अमर उजाला।

किसान परिवार से रखते हैं ताल्लुक
कैंपियरगंज के जगतबेला के रहने वाले पन्नेलाल का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। महज, छह साल की उम्र से ही पहलवानी में हाथ आजमाना शुरू कर दिया था। उन्होंने वर्ष 1977 में रूस में आयोजित वर्ल्ड रेलवे चैंपियनशिप, वर्ष 1982 में कनाडा के एडमिंटन में आयोजित विश्व कुश्ती चैंपियनशिप, 1984 में पाकिस्तान में आयोजित फ्रेंडली मैच में पहला स्थान, 85 में पेरिस में आयोजित कुश्ती चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। 1989 में सीरिया के दमिश्क में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कुश्ती में रजत पदक हासिल करने के साथ लगातार दस साल तक नेशनल चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

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Gorakhpur wrestler Pannelal Yadav had scored in Commonwealth 1978
पहलवान पन्नेलाल यादव। - फोटो : अमर उजाला।
लक्ष्मण और यशभारती पुरस्कार मिला
कुश्ती में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें सरकार ने वर्ष 1994 में यश भारती और वर्ष 2015 में लक्ष्मण पुरस्कार से नवाजा है। शानदार रिकार्ड की वजह से उन्हें रेलवे में टीटी इंस्पेक्टर के रूप में नौकरी मिली। दस साल पूर्व वो वहां से रिटायर हो चुके हैं।
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