गोरखपुर जिले के नौसड़ इलाके की कई नई कॉलोनियों के लिए बरसात किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। जलनिकासी का प्रबंध नहीं होने के चलते तेज बारिश होते ही पानी सड़क पर भरने लगता है। बगहाबीर बाबा स्थान के सामने की कॉलोनी में तो बरसात का पानी ही बाढ़ जैसा लगने लगा है। कॉलोनी की मुख्य सड़क पर नाव चलानी पड़ रही है। मोहल्ले के लोग नाव से सड़क तक आते हैं और यहां से फिर अपने गंतव्य को जाते हैं।
मोहल्ला लाइव: गोरखपुर के इन कॉलोनियों से निकलने के लिए नाव का आसरा, मुसीबत बनी है बरसात
गोरखपुर-वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे तेजी से नए मोहल्ले विकसित हो रहे हैं। नगर निगम क्षेत्र में शामिल इन मोहल्लों में एक तो अभी विकास की रफ्तार बहुत धीमी है, दूसरे अधिकांश घर अनियोजित तरीके से बन गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कॉलोनी की कई सड़कों पर दो से तीन फुट तक पानी भरा रहता है। यह पानी धीरे-धीरे स्वत: ही समाप्त होता है। इस बार कम ही दिनों में ज्यादा बारिश हो गई। इसके चलते निचले इलाके में बसी इस कॉलोनी में जलभराव की समस्या गंभीर हो गई। मुख्य मार्ग के किनारे ही बने मकानों के सामने भी घुटने भर पानी लगा है। कॉलोनी के अंदर की हालत इससे भी अधिक गंभीर है। प्रशासन की तरफ से नाव लगाई गई है जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है।
इसे भी पढ़ें- एक था जगदीशपुर गांव, राप्ती ने मिटा दिया वजूद
परिचितों के घर खड़ी हैं गाड़ियां
नई बसी कॉलोनियों में मध्यम वर्ग के लोगों के मकान हैं। कोई नौकरी करता है तो कोई दुकानदार है। लिहाजा सभी के पास अपनी-अपनी गाड़ी है लेकिन सड़क पर पानी के चलते कोई गाड़ी अंदर नहीं ले जा पा रहा है। सभी ने मुख्य सड़क के किनारे अपने परिचितों के यहां गाड़ी खड़ी की है। लोग घुटनों तक पैंट मोड़कर नाव से सड़क पर आते हैं और यहां से जूता-चप्पल पहनकर अपने दफ्तर, दुकान, स्कूल आदि जगहों पर जाते हैं।
इसे भी पढ़ें- गोरखपुर में बदला मौसम: आसमान में छाए काले बादल, झमाझम बारिश से मौसम हुआ सुहाना
बोले मोहल्ले के लोग
दीपक ने बतया कि दरवाजे तक पानी लगा है। पिछले तीन साल से बरसात में ऐसी दिक्कत हो रही है। जलनिकासी का कोई प्रबंध नहीं किया गया। जिस रास्ते पानी बहता था, उस पर कई लोगों का नया मकान बन गया है। प्रशासन की तरफ से अब तक कोई इंतजाम नहीं किया गया। सड़क को ही अगर ऊंचा कर दिया जाए तो भी समस्या का हल निकल सकता है।
अंकित यादव ने कहा कि हाइवे के किनारे जो नाला बना है, वह भी अधूरा है। बरसात होने पर आसपास के घरों का पानी तो यहां जमा होता ही है, हाइवे के किनारे बसे अन्य घरों का पानी भी नाले से बहकर यहीं आ जाता है। आगे पानी निकलने का रास्ता नहीं होने के चलते यहां जलभराव की स्थिति गंभीर बन जाती है। गंदे पानी में महीनों तक आवागमन हमारी मजबूरी बन चुकी है।
उर्मिला वर्मा ने बताया कि आठ महीने का बेटा सर्दी, बुखार से पीड़ित है। इलाज के लिए नौसड़ जाना है। नाव से किसी तरह से निकलकर सड़क तक आई हूं। मोहल्ले के कई अन्य घरों में यही स्थिति है। तीन महीने तक हम लोगों को बाढ़ जैसी पीड़ा झेलनी पड़ती है। कॉलोनी में कई घरों के बाहर पानी है। कोई पूछने भी नहीं आया।
मनोज गौड़ ने कहा कि सबसे अधिक दिक्कत स्कूल जाने वाले बच्चों के सामने है। हम लोग पैंट व जूता हाथ में लेकर नाव से सड़क तक आते हैं। यहां से पहनकर स्कूल जाते हैं। वापस आने पर यहीं से जूता व पैंट हाथ में टांगकर घर पहुंचते हैं। कई परिवारों के लोग बच्चों को रोज यहां तक छोड़ने आते हैं और शाम को आकर फिर साथ ले जाते हैं।