गोरखपुर में मौसम का मिजाज फिर बदल गया है। सूर्य की तपिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। मंगलवार को पारा भी 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। मौसम में नमी भी कम हो गई, जिसके चलते धूप ज्यादा महसूस की गई। दोपहर के वक्त प्रमुख बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। जरूरी काम से ही लोग घरों से निकल रहे हैं। चौराहों पर लोग कड़ी धूप से बचने के लिए छांव की तलाश करने लगे। मौसम विभाग के मुताबिक तापमान अभी बढ़ता ही जाएगा। तीन से चार दिनों में तापमान के 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। यानी कि अभी भीषण गर्मी सहने के लिए तैयार रहना पड़ेगा।
Gorakhpur Weather: बढ़ती जा रही सूरज की तपिश, धूप में मुरझा जा रहे चेहरे
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पिछले दिनों हुई बारिश के बाद से मौसम खुशगवार हो गया था। लेकिन, दो दिनों से तापमान फिर चढ़ने लगा है। तपिश और उमस के चलते लोग दोपहर में सड़क पर निकलने से लोग कतराते रहे। मंगलवार दिन में चार बजे तक तेज धूप खिली रही। गर्मी बढ़ने के कारण लोग सिर और चेहरा ढक कर घरों से निकले। तेज धूप होने के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्ग, छात्रों से लेकर नौकरीपेशा वालों को कठिनाई का सामना करना पड़ा। सोमवार को अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस था। जबकि, मंगलवार को बढ़कर अधिकतम तापमान 39.4 डिग्री व न्यूनतम तापमान 26.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक तीन से चार दिनों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस पहुंच सकता है। आसमान साफ रहेगा।
आने वाले दिनाें में यूं बढ़ेगा तापमान
दिन न्यूनतम अधिकतम
31 मई 27 41
एक जून 28 41
दो जून 28 41
तीन जून 28 42
चार जून 28 42
सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर, डायरिया के
फिजिशियन डॉक्टर ओंकार राय बताते है कि मौसम में अचानक बदलाव के चलते बुखार, जुकाम, सर्दी, खांसी व बच्चों में इन्फेक्शन के मरीज इलाज को आ रहे हैं। ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज वायरल फीवर, डायरिया और मौसमी संक्रमण यानि सर्दी-खांसी के आ रहे हैं। इसके चलते सुबह से ही अस्पताल के नेत्र, फिजिशियन, सर्जन, चाइल्ड, डेंटल विभाग में मरीजों की भीड़ लगी रही।
90 प्रतिशत मरीजों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द व हल्के बुखार की शिकायत
जिला अस्पताल बाल रोग विशेषज्ञ डॉ गणेश कुमार ने कहा कि जिला अस्पताल के ओपीडी में रोज लगभग 150 बच्चे आ रहे हैं। इनमें से 90 प्रतिशत को उल्टी, दस्त, पेट दर्द व हल्के बुखार की शिकायत है। जांच में ज्यादातर में टाइफायड निकल रहा है। गर्मी के मौसम में आंतों में बैक्टीरिया तेजी से अपना फैलाव करते हैं। ऐसे में यदि दूषित जल या भोजन लिया जाए तो उनकी वृद्धि में और इजाफा होता है। इस वजह से बच्चों में हल्का बुखार, पेट दर्द, उल्टी, दस्त, सर्दी-खांसी, जुकाम आदि की दिक्कतें तेजी से बढ़ी हैं।