पंजाब की एक यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने वाली ममता अपने खुले विचारों, हंसमुख स्वभाव और आधुनिक सोच के लिए जानी जाती थी। वहीं, उसके पति विश्वकर्मा चौहान की पढ़ाई सिर्फ 10वीं तक हुई थी और उसका स्वभाव संकीर्ण माना जाता था। पड़ोसियों का कहना है कि वह बेटी पर जान छिड़कती थी और उसके हर शौक पूरा करती थी। वैचारिक मतभेद धीरे-धीरे इतने गहरे हो गए कि अंत में विश्वकर्मा ने पत्नी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया।
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आरोपी पति और महिला की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पड़ोसन रागिनी ने बताया कि ममता बेहद खुशमिजाज और मददगार थीं। हमेशा मुस्कुराते चेहरे के साथ वह न सिर्फ अपनी बेटी बल्कि पड़ोसियों के सुख-दुख में भी शामिल रहती थी। वह घर और नौकरी दोनों जिम्मेदारियां बखूबी निभाती थी। बेटी की पढ़ाई, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों में बराबर साथ देती थी। करियर और परिवार को संतुलित रखने वाली ममता का इस तरह अचानक चला जाना सभी के लिए अविश्वसनीय है।
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महिला की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सोशल मीडिया अकाउंट की हो रही जांच
सूत्रों के अनुसार, विश्वकर्मा को शक था कि ममता का किसी से संबंध है। इस कारण वह पत्नी से और दूर होता गया और अन्य लड़कियों से बातचीत करने लगा। करीब 15 महीने पहले दोनों के बीच बड़ा विवाद हुआ, जिसके बाद अलग रहने की बात शुरू हो गई। ममता बैंक रोड पर एक निजी कंपनी में कार्यरत थी और पति से दूरी बना ली थी।
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घटनास्थल पर मामा के साथ आई ममता की बेटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बेटी की परवरिश को लेकर कोर्ट केस
भाई संदीप ने बताया कि किसी की सलाह पर ममता ने बेटी की परवरिश के लिए कोर्ट में आवेदन किया था। इसके बाद तलाक की प्रक्रिया भी शुरू हुई। केस अब अंतिम चरण में था और ममता की गवाही बाकी थी लेकिन वह पेशी पर नहीं जा रही थीं।
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इसी स्टूडियो के बाहर महिला की हत्या की गई
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उधर, विश्वकर्मा तलाक को लेकर परेशान था और बार-बार ममता के भाइयों से शिकायत करता था कि वह जानबूझकर केस लंबा खींच रही है। बार-बार कहने पर भी गवाही देने नहीं आ रही। दहेज का सामान भी वापस कर दिया है। अब वह ज्यादा रुपये की मांग कर रही थी ये बात गलत है।