गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के घोषीपुरवा में हथौड़े से सिर कूंचकर शांति देवी (90) और उनकी बेटी विमला जायसवाल (55) की हत्या मामले में पुलिस ने जांच तेज कर दी है। प्रारंभिक जांच में पुलिस का कहना है कि हत्या पूरी तरह योजनाबद्ध है। लूट प्राथमिक कारण नहीं लगता। हत्यारा मृतकों का परिचित था। वहीं परिवार लूट और नकदी-गहने गायब होने को हत्या का मुख्य कारण बता रहा है। पुलिस संपत्ति विवाद, ई-रिक्शा पार्किंग को लेकर चल रहे झगड़े और परिचितों की भूमिका जैसे कई एंगल से जांच को आगे बढ़ा रही है।
मां-बहन की हत्या की सूचना पर छोटी बेटी सुशीला, पति नवीन जैन व बच्चों के साथ लखनऊ से गोरखपुर पहुंचीं। सुशीला के मुताबिक, उनकी बहन विमला के घुटने का ऑपरेशन होना था, जिसके लिए उसने 8.50 लाख रुपये दिए थे। रकम घर में रखी थी और विमला अक्सर सोने की चेन व 18 ग्राम की ब्रेसलेट पहनती थीं, जो गायब है।
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छोटी बेटी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुशीला का दावा है कि हत्यारे ने वारदात के बाद नकदी और जेवरात दोनों ले लिए। हालांकि उनकी मां शांतिदेवी के शरीर पर उनके जेवर जस के तस मिले, जिससे परिजन आश्वस्त हैं कि हत्या सिर्फ लूट के लिए नहीं हुई। सुशीला ने यह भी बताया कि उनकी बहन को मोहल्ले के एक ई-रिक्शा चालक से काफी समय से विवाद था।
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मां-बेटी की हत्या के मामले की जांच करती टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चालक घर के गेट के सामने ई-रिक्शा खड़ा करके चार्जिंग करता था और मना करने पर गाली-गलौज करता था। शाहपुर पुलिस के अनुसार, यह घटना योजनाबद्ध है और लूट प्राथमिक कारण नहीं लगता। जांच टीम ने संपत्ति, पुराने झगड़ों और मृतका विमला के संपर्कों की जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल कॉल डिटेल, वित्तीय लेनदेन, पुराने विवादों और पड़ोसियों के बयान खंगाल रही है।
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दोहरे हत्याकांड के बाद मौके पर पहुंची पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
20 नवंबर को हुई थी अंतिम बातचीत
सुशीला ने बताया कि 20 नवंबर को उनकी मां और बहन से बात हुई थी, सब कुछ सामान्य था। एक माह पहले वह अपनी आंख का ऑपरेशन कराने गोरखपुर आई थीं और 20 दिन मां-बहन के साथ रहकर लौटी थीं। हत्या की खबर सुनकर वह दोबारा परिवार संग शहर पहुंचीं।
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दोहरे हत्याकांड के बाद मौके पर पहुंची पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस की नजर मकान की हिस्ट्री पर
सुशीला ने बताया कि उनके पिता रामनरेश ने जीवनकाल में यह मकान नाती ऋषभ के नाम वसीयत कर दी थी। इसके बाद ऋषभ ने बालिग होने पर अपनी मां सुशीला को पावर ऑफ अटॉर्नी सौंप दी, जिन्होंने पांच वर्ष पूर्व एक प्रॉपर्टी डीलर अजय मिश्रा को 55 लाख रुपये में रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी कर दिया था। बताया जा रहा है कि उसी समय दूसरी पत्नी की बेटियों से कमरे खाली कराए गए थे। घोषीपुरवा स्थित यह मकान करीब 4000 वर्ग फीट का है।