कितना आनंद आएगा यहां जलने में...अत्याधुनिक है यह, यहां जलने पर डायरेक्ट स्वर्ग जाओगे। राजघाट एवं रामघाट के लोकार्पण के अवसर पर फरवरी 2021 में आयोजित जनसभा में ये बातें कहकर सांसद रवि किशन ने गैसीफायर शवदाह गृह के बारे में कहीं थीं। उनके इस बयान ने खूब सुर्खियां भी बटोरी थीं। लेकिन, लोगों को बेहतर सुविधा और पर्यावरण की बेहतरी में योगदान देने के दावे के साथ बना गैसीफायर शवदाह गृह बीते छह महीने से बंद है। यहां शव फड़ पर ही जलाया जा रहा है। सांसद की बातों को याद करके लोग चुटीले अंदाज में कहते हैं कि जब जलेंगे ही नहीं तो मजा कैसे आएगा?
अमर उजाला पड़ताल: जब बंद है गोरखपुर का राजघाट शवदाह गृह तो जलकर कैसे जाएंगे सीधे स्वर्ग
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि गैसीफायर शवदाह गृह पर मोटर खराब होने की जानकारी मिली है। जिस फर्म को संचालन की जिम्मेदारी दी गई है उससे जुड़े लोगों को बुलाया गया है। उनके साथ बैठक कर शवदाह गृह की सुविधा को बेहतर करने का सुझाव दिया जाएगा।
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समस्या क्या है
शवदाह गृह का निर्माण ग्रीन रेवोल्युशन फाउंडेशन ने करायाथा। पांच साल तक संचालन की जिम्मेदारी भी इसी फर्म के पास है। फर्म की ओर से शवदाह गृह की देखरेख करने वाले अभिषेक कुमार ने बताया कि मशीन में पानी का प्रेशर दिया जाता है, ताकि शव जलने पर धुआं ज्यादा न हो। पानी का प्रेशर देने के लिए संपवेल लगा है, जिसमें पांच हार्स पावर का मोटर लगाया गया है। यह मोटर जल गया है और ठीक नहीं हो पा रहा है।
अक्तूबर से ही रजिस्ट्रेशन नहीं हुआ
शवदाह गृह स्थल पर एक कमरा रजिस्ट्रेशन के लिए है। गैसीफायर मशीन से शव का अंतिम संस्कार कराने का रजिस्ट्रेशन शुल्क 1,800 रुपये, जबकि फड़ के लिए 200 रुपये है। यहां रखे रजिस्टर को देखने पर पता चला कि फड़ पर अंतिम संस्कार करने के लिए रोजाना सात से आठ लोग पहुंचते हैं। नवंबर से इस रजिस्टर में ब्योरा दर्ज किया गया है, लेकिन एक भी रजिस्ट्रेशन गैसीफायर मशीन से अंतिम संस्कार का नहीं है।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बताया कि गैसीफायर शवदाह गृह पर मोटर खराब होने की जानकारी मिली है। जिस फर्म को संचालन की जिम्मेदारी दी गई है उससे जुड़े लोगों को बुलाया गया है। उनके साथ बैठक कर शवदाह गृह की सुविधा को बेहतर करने का सुझाव दिया जाएगा।
पांच माह पहले नहीं मिली सुविधा
बक्शीपुर निवासी गौरव श्रीवास्तव ने बताया कि करीब पांच महीने पहले पिताजी का देहांत हुआ था। रिश्तेदारों ने बताया कि नए शवदाह गृह में धार्मिक रीति रिवाज के साथ बेहतर ढंग से अंतिम संस्कार हो जाता है। लेकिन, वहां पहुंचने पर पता चला कि शवदाह गृह पर लगी मशीन काम नहीं कर रही है। फिर हम लोग उसी रास्ते राजघाट पर चले गए।
घाट पहुंचने पर पता चला मशीनें बंद हैं
जगन्नाथपुर निवासी देवेश सिंह ने कहा कि चाचा का निधन 22 मार्च 2023 को हुआ था। जब हम लोग राजघाट पहुंचे तो पता चले गैसीफायर मशीन खराब है। फिर चाचा का अंतिम संस्कार राप्ती नदी के तट पर किया गया। अगर शहर में कोई सुविधा शुरू हो रही है, तो उसके रखरखाव और उसे चालू हालत में रखने जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
बेतियाहाता रवि भूषण ने बताया कि जनवरी में रिश्तेदार का निधन हुआ था। सभी लोगों ने सोचा कि अंतिम संस्कार शवदाह गृह पर ही कर दिया जाए। मैं ही रजिस्ट्रेशन कराने पहले पहुंच गया था। पता चला कि अभी सुविधा बंद है। फड़ पर शव जला सकते हैं। फिर सबने कहा कि इससे अच्छा घाट पर जाकर अंतिम संस्कार करेंगे।
शवदाह गृह पर टूटी मिलीं टाइल्स, सीढि़यां व पंप
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने बुधवार को राप्ती नदी के तट पर स्थित अंत्येष्ठि स्थल का निरीक्षण किया। यहां कई जगह टाइल्स व सीढ़ियां टूटी मिलीं, एवं सबमर्सिबल पंप खराब मिला। जिसे नगर आयुक्त ने ठीक करने के लिए अधिशासी अभियंता को निर्देशित किया। नगर आयुक्त ने बताया कि अगले छह माह तक लकड़ी एवं गैस आधारित शवदाह संयंत्र में अंतिम संस्कार कराने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा। केवल रजिस्ट्रेशन शुल्क देकर अंतिम संस्कार कराया जा सकेगा। निरीक्षण के दौरान अधिशासी अभियंता नर्वदेश्वर पांडेय, अवर अभियंता अवनीश भारती, संचालन करने वाली फर्म ग्रीन रेवोल्यूशन फाउंडेशन के मालिक संजीव साहनी आदि उपस्थित रहे।