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जाम से परेशानी: अयोध्या से गीडा तक मात्र दो घंटे, मगर पैडलेगंज तक घिसटने में गवां देते हैं एक से डेढ़ घंटा

Wed, 05 Apr 2023 03:25 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 05 Apr 2023 03:25 PM IST
सार

टीपीनगर से राजघाट तक की सड़क नो वेंडिंग जोन घोषित करने के बाद, नगर निगम प्रशासन इसी सप्ताह यहां से ठेले-खोमचे वालों को हटाना शुरू कर देगा। इन्हें टीपीनगर पुलिस चौकी के पीछे बनाए गए शेड में शिफ्ट किया जाएगा।

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Gorakhpur residents troubled by jam every day
रूस्तमपुर चौक के पास रोड पर खड़े आटो - फोटो : अमर उजाला।

गोरखपुर में सड़क चौड़ी कराए बिना सिर्फ ठेला-खोमचा और अवैध ऑटो स्टैंड हटाने मात्र से जाम से काफी राहत मिल सकती है। नगर निगम ने फिलहाल राजघाट से टीपी नगर चौराहे तक को नो वेंडिंग जोन घोषित किया है। मगर, लोगों का कहना है कि इसका दायरा बढ़ाकर पैडलेगंज तक किया जाना चाहिए।



रोडवेज की बसों के अलावा, शहर की बड़ी आबादी अपने निजी वाहनों से भी लखनऊ से नौसड़ होते हुए पैडलेगंज तक आती है। लेकिन सड़क के दोनों किनारे दो से तीन कतार में ठेले-खोमचे और ऑटो वालों के खड़ा होने की वजह से अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है।

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नतीजा यह होता है कि अयोध्या से गीडा पहुंचने में जहां सिर्फ दो घंटे लगते हैं वहीं नौसड़ से पैडलेगंज पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे तक का वक्त लग जाता है। जबकि, यही दूरी सुबह और रात के वक्त 10 से 15 मिनट में पूरी हो जाती है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर नौसड़ से पैडलेगंज तक फोरलेन सड़क बन जाने से काफी राहत हो गई वर्ना 2018 के पहले इस रूट के दो लेन का होने पर स्थिति और खराब थी। लोगों को शहर से बाहर यानी नौसड़ पहुंचने में ही दो घंटे से अधिक का समय लग जाता था।
 

Gorakhpur residents troubled by jam every day
रोड पर लगी दुकानें। - फोटो : अमर उजाला।

दो साल से खाली है ठेले-खोमचे वालों के लिए बना शेड
फोरलेन बनने पर शुरुआत में गाड़ियां फर्राटा भरते हुए निकल जाती थीं मगर धीरे-धीरे ठेले-खोमचे और ऑटो वालों का कब्जा शुरू होने के साथ ही साथ फिर जाम की स्थिति बनने लगी। अब यह मार्ग सिक्स लेन बन रहा है मगर अभी भी स्थिति सुधरती नहीं नजर आ रही है।

इस रूट पर लगने वाले जाम की ही वजह से शासन-प्रशासन को यहां सिक्स लेन ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराना पड़ा है, जिस पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तब तक जाम की समस्या कम करने और सुगम यातायात के लिए नगर निगम प्रशासन ने टीपीनगर से राजघाट तक नो वेंडिंग जोन घोषित कर दिया है। जल्द ही ठेले-खोमचे वालों को इस क्षेत्र से हटाने का काम शुरू हो जाएगा।

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टीपीनगर से राजघाट तक की सड़क नो वेंडिंग जोन घोषित करने के बाद, नगर निगम प्रशासन इसी सप्ताह यहां से ठेले-खोमचे वालों को हटाना शुरू कर देगा। इन्हें टीपीनगर पुलिस चौकी के पीछे बनाए गए शेड में शिफ्ट किया जाएगा।

गत सोमवार को नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने पथ विक्रय समिति के साथ बैठक की थी। इसमें रुस्तमपुर ढाला से ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस चौकी तक सड़क किनारे ठेले-खोमचे लगाने वालों की वजह से ट्रैफिक जाम पर चर्चा हुई। तय हुआ कि अगले तीन से चार दिनों में ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस चौकी से राजघाट पुल तक सड़क के किनारे ठेला लगाने वालों को ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस चौकी के पीछे बनाए गए शेड में व्यवस्थित कर दिया जाएगा।

रुस्तमपुर ढाले के पास बनाए गए शेड 20 ठेले वालों के लिए आवंटित है, वहीं ट्रांसपोर्टनगर में कुल 240 दुकानदारों के लिए शेड बनाए गए हैं। इन्हें बनकर तैयार हुए और आवंटित हुए दो साल का समय हो गया मगर अभी तक सभी खाली हैं। पटरी व्यापारियों की दलील है कि शेड, मुख्य मार्ग से काफी भीतर की तरफ है। वहां शिफ्ट होने पर उनका व्यापार काफी प्रभावित होगा। कोई ग्राहक वहां पहुंचेगा ही नहीं।

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नौसड़ चौक के पास रोड पर लगी दुकानें - फोटो : अमर उजाला।

नौसड़ चौराहे पर पूरे साल जमे रहते हैं फल-सब्जी वाले
नौसड़ चौराहे के आसपास पूरे साल मौसमी फल और सब्जी वालों का कब्जा बना रहता है। नौसड़ चौकी से ठीक सटे इस क्षेत्र में रोजाना ट्रकों से फल और सब्जियां आती हैं और सड़क किनारे ही इन्हें रखकर दुकानदार बेचते हैं। यहां भी खरीदारी के लिए प्राय: लोग सड़क पर ही गाड़ियां खड़ी कर देते हैं जिससे जाम लग जाता है।

फुटकर मंडी की तुलना में यहां तरबूज-खरबूज, खीरा-ककड़ी, कटहल आदि फल और सब्जियां काफी सस्ती मिलने की वजह से आस-पास के लोगाें के अलावा शहर से भी रोजाना बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। यही नहीं लखनऊ, बस्ती, खलीलाबाद और वाराणसी रूट से आने वाले वाले ज्यादातर लोग यहां गाड़ियां खड़ी कर मौसमी फल और सब्जियों की खरीदारी करते हैं और तब फिर घर के लिए निकलते हैं।

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सिकुड़कर 10 फीट हो जाता है राजघाट पुल
यूं तो पैडलेगंज से लेकर नौसड़ तक पूरे रास्ते जगह-जगह ठेले-खोमचों वालों का कब्जा है मगर सबसे खराब स्थिित रुस्तमपुर, टीपीनगर और राजघाट पुल की है। ट्रांसपोर्टनगर पुलिस चौकी से राजघाट पुल तक सड़क के किनारे फल वाले कतार से ठेला लगाए रहते हैं। ऐसे में फल आदि खरीदने वाले अपनी-अपनी गाड़ियां खड़ी कर देते हैं।

30 मीटर से अधिक दूरी तक पुल के बाएं तरफ की लेन 20 फीट से सिकुड़कर मात्र 10 फीट की रह जाती है। इसी तरह रुस्तमपुर ढाले के पास दोनों तरफ खाने-पीने के ठेले वाले और ऑटाे रिक्शा वालों की वजह से जाम की समस्या तो बरकरार होती ही है स्थायी दुकानदारों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विरोध करने पर विवाद की स्थिति खड़ी हो जाती है। यही हाल टीपी नगर चौराहे के आस-पास का भी है।

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रोड पर लगी दुकानें - फोटो : अमर उजाला।

लाखों-करोड़ों की पूंजी लगाकर दुकानदार भी परेशान
पैडलेगंज से लेकर नौसड़ तक आधी सड़क पर ठेले-खोमचे और ऑटो खड़ा करने वालों से लाखों-करोड़ों रुपये की पूंजी लगाकर इस क्षेत्र में व्यवसाय करने वाले स्थायी दुकानदार भी परेशान हैं। दुकानों के सामने ठेले-खोमचे और ऑटो वालों के खड़े हो जाने से जाम की समस्या तो उत्पन्न होती ही है, इनकी दुकानदारी भी प्रभावित होती है।

इन दुकानदारों का कहना है कि जाम की वजह से ज्यादातर ग्राहक, दुकान तक आने में कतराते हैं। कई ग्राहकों को तो दुकान ही नहीं दिखती। उनकी मांग है कि इन्हें व्यवस्थित किया जाना चाहिए ताकि उनकी भी रोजी-रोटी बची रहे और हमारा व्यवसाय भी प्रभावित न हो।

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बोले आमजन
साहबगंज निवासी कमलेश अग्रवाल ने कहा कि पिछले एक दशक से अधिक समय से यह समस्या बनी हुई है। कई बार प्रयास करने के बाद भी नगर निगम और पुलिस प्रशासन, ठेले-खोमचे वालों को पैडलेगंज से नौसड़ तक के बीच से हटा नहीं सका। इनकी वजह से लखनऊ या वाराणसी रूट पर जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नौसड़ तक पहुंचने में ही काफी समय खर्च हो जाता है। इतने ही समय में कोई भी व्यक्ति नौसड़ से बस्ती के आगे तक पहुंच जाता है।

डॉ बीएन विश्वकर्मा ने कहा कि पैडलेगंज से लेकर नौसड़ के बीच रुस्तमपुर तक तो अब सिक्स लेन की सड़क बन गई है। मगर इसके पहले भी सड़क काफी चौड़ी थी। मगर ठेले-खोमचे और ऑटो वालों का ही आधी सड़क तक कब्जा रहता है। किसी भी शहर का एंट्री प्वाइंट उस शहर की संपन्नता और विकास को दर्शाता है मगर यहां नौसड़ से मुड़ते ही अचानक से लोगों को जाम का सामना करना पड़ता है। नो वेडिंग जोन का दायरा सिर्फ टीपी नगर से राजघाट तक ही नहीं बल्कि नौसड़ से पैडलेगंज तक होना चाहिए।

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क्षेत्र के स्थायी दुकानदारों का दर्द

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नौसड़ चौक के पास रोड पर लगी दुकानें - फोटो : अमर उजाला।

रविंद्र कुमार ने कहा कि ठेले-खोमचों वालों से बहुत नुकसान होता है। दुकान के सामने ही ये अपनी दुकानदारी जमा लेते हैं जिससे बिक्री प्रभावित होती है। विरोध करने पर लड़ाई करने लगते हैं। इन्हें व्यवस्थित किया जाना बहुत जरूरी है।

राम प्रवेश शर्मा ने कहा कि नगर निगम का प्रयास सराहनीय है। हालांकि इसके पहले भी ठेले-खोमचों वालों को सड़क किनारे से हटाया गया था लेकिन वे फिर जम जाते हैं। इनकी वजह से स्थायी दुकानदारों को नुकसान उठाना पड़ता है।

पंकज ने कहा कि ठेले-खोमचों वालों की संख्या इतनी अधिक हो गई है कि वे अब मनमानी करते हैं। कितना भी अनुरोध करिए दुकानों के सामने ही अपनी अस्थायी दुकानें सजा लेते हैं। स्थायी वाली दुकान पीछे होने की वजह से ग्राहकों को दिखती ही नहीं।

ऋषि देव ने कहा कि ठेले-खोमचों और ऑटो वालों की वजह से प्राय: जाम लग जाता है। ग्राहक दुकान तक आने में कतराते हैं। प्राय: यह दुकानों के सामने ही अपना ठेला-खोमचा और ऑटो लगा लेते, जिससे दुकान दिखती ही नहीं। आय प्रभावित होती है।

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