तस्वीरें: इस चमत्कारी बाबा से मंत्र लेकर प्रधानमंत्री बनी थीं इंदिरा गांधी, दिया था ये खास चुनाव चिन्ह
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हम बात कर रहे हैं देवरहा बाबा की। देवरहा बाबा सहज, सरल और शांत प्रवृति के थे और इनके पास बहुत ज्ञान था। देवरिया जिले में रहने के कारण इनका नाम देवरहा बाबा पड़ा था। कुछ मान्यताओं के अनुसार, आयु, योग, ध्यान और आशीर्वाद, वरदान देने की क्षमता के कारण लोग उन्हें सिद्ध संत कहते थे। उनके अनुयायियों का मानना है कि वह 250 से 500 वर्ष तक जीवित रहे। 19 जून 1990 के दिन अपना शरीर छोड़ने वाले देवरहा बाबा की चमत्कारी शक्ति को लेकर तरह-तरह की बातें कही-सुनी जाती हैं।
कहा जाता है कि बाबा जल पर भी चलते थे, उन्हें प्लविनी सिद्धि प्राप्त थी। किसी भी गंतव्य पर पहुंचने के लिए उन्होंने कभी सवारी नहीं की। बाबा हर साल माघ मेले के समय प्रयाग जाते थे। यमुना किनारे वृंदावन में वह आधा घंटे तक पानी में, बिना सांस लिए रह लेते थे। देवरहा बाबा ने अपनी उम्र, तप और सिद्धियों के बारे में कभी कोई दावा नहीं किया, लेकिन उनके इर्द-गिर्द हर तरह के लोगों की ऐसी भी भीड़ रही, जो उनमें चमत्कार तलाशती थी। बाबा मचान पर बैठे-बैठे ही श्रद्धालुओं को धन्य करते थे। कई लोगों का दावा था कि भक्तों की बात उनके होंठों तक आने से पहले ही बाबा उनके मन की बात जान लेते थे।