होलिका दहन के बाद सूरज की तपिश बढ़ती जा रही है। अप्रैल के पहले दिन तक औसत तापमान सामान्य से तीन-चार डिग्री सेल्सियस ज्यादा पहुंच चुका है। तेज पछुआ हवाएं मई-जून के लू का एहसास कराने लगी हैं।
मौसम अपडेट: अप्रैल में जून जैसी गर्मी, सेहत व फसलों पर संकट के बादल
हैरान कर देने वाले मौसम के इस तेवर का लोगों की सेहत पर तो असर देखा ही जा रहा है, इससे फसलों की भी हालत पतली हो गई है। किसानों का कहना है कि उनकी गेहूं और जौ की फसलों की पैदावार घट सकती है। दाने मजबूत होने से पहले ही बालियां सूख गई हैं। जिससे 15 से 20 फीसदी पैदावार कम होगी। दानों की साइज और चमक भी गायब हो चुकी है।
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि अप्रैल भर तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज, अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉ. अमर नाथ मिश्र ने बताया कि बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 37.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो सामान्य से 2.9 डिग्री ज्यादा है। इसी तरह न्यूनतम तापमान 21 डिग्री पर पहुंचा। जो सामान्य से 4.1 डिग्री सेल्सियस अधिक है।
सेहत बिगाड़ रहा मौसम
बदलते मौसम में इन दिनों सर्दी, जुकाम, बुखार, बदन दर्द, सिर दर्द, आंखों में जलन, पेट दर्द जैसी बीमारियां लोगों को अपनी चपेट में ले रही हैं। अस्पतालों में आने वाले अधिकांश मरीज खांसी, जुकाम और बुखार से पीड़ित हैं। जिला अस्पताल के फिजिशियन का कहना है कि जिन लोगों को सर्दी, जुकाम, बुखार जैसी बीमारियां जल्दी होती हैं, उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए दिन में एक या दो बार ग्रीन या ब्लैक टी का सेवन किया जा सकता है। इसके अलावा विटामिन डी और सी युक्त पदार्थ जैसे नींबू और आंवले का सेवन करें। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके गौड़ का कहना है कि मौसम में परिवर्तन का सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे बच्चों पर पड़ता है। बच्चे ठंडी चीजों का सेवन करते हैं और ठंडे पानी से नहाते हैं। इससे वे जल्दी खांसी, जुकाम की चपेट में आ जाते हैं। इसलिए बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।