उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बनकटा क्षेत्र के जिरवनिया गांव की साहसी बेटियों ने समाज की पुरानी परंपराओं और वर्जनाओं को दरकिनार करते हुए अपने पिता की मौत के बाद उनकी अर्थी को खुद आगे बढ़कर कंधा दिया। बेटियों द्वारा उठाए गए इस साहसिक कदम की बुद्धिजीवी वर्ग में काफी प्रशंसा हो रही है।
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पिता की अर्थी को बेटियां ने दिया कंधा।
- फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि क्षेत्र के जिरवनिया गांव के निवासी हरेंद्र शर्मा की छह बेटियां हैं। जिनमें से पूनम, सुमन और शीला की शादी हो चुकी है। जबकि निक्की, पूजा और मनीषा अभी अविवाहित हैं। लड़का नहीं होने का उन्होंने कभी अफसोस नहीं जताया बल्कि इसके उलट अपनी सभी बेटियों को काफी लाड़ प्यार से पालकर उच्च शिक्षा भी दिलाई।
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रोते- बिलखते पिता की अर्थी को कंधा देती बेटियां।
- फोटो : अमर उजाला।
शुगर, किडनी और लिवर की बीमारी से ग्रस्त हरेंद्र शर्मा का इलाज उनकी बेटी और दामाद दिल्ली से करा रहे थे। इस दौरान शनिवार को हरेंद्र शर्मा की मौत हो गई। पुत्र नहीं होने के कारण मृतक की अर्थी को कंधा कौन देगा इस बात को लेकर गांव वालों में खुसर फुसर होने लगी।
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रोते- बिलखते पिता की अर्थी को कंधा देती बेटियां।
- फोटो : अमर उजाला।
जब मृतक शर्मा की बेटियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने साहसिक कदम उठाते हुए कहा कि पिता जी ने जब हमें पालने पोसने से लेकर पढ़ाने लिखाने में कोई भेद भाव नहीं किया और हम सभी बहनों को पुत्र की ही तरह प्यार दिया है तो हम भी पिता की अर्थी को कंधा देकर पुत्र का फर्ज निभाएंगे।
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रोते- बिलखते पिता की अर्थी को कंधा देती बेटियां।
- फोटो : अमर उजाला।
एकबारगी तो इस फैसले पर लोग अवाक रह गए लेकिन जब इस बात की जानकारी गांव और क्षेत्र के बुद्धिजीवियों को मिली तो बेटियों के इस साहसिक कदम की चहुंओर प्रशंसा होने लगी। इसके बाद मृतक की पत्नी कुसुम देवी और सभी बेटियों ने रोते बिलखते हुए अर्थी को कंधा दिया। स्याही नदी के किनारे मृतक का अंतिम संस्कार किया गया। वहीं मुखाग्नि बड़ी लड़की के पुत्र आयुष शर्मा ने दिया। बेटियों द्वारा उठाए गए इस साहसिक कदम की क्षेत्र में काफी प्रशंसा हो रही है।