जीनोम सीक्वेसिंग के लिए शासन से किट नहीं मिलने से कोरोना वायरस की संरचना और बदलाव में प्रस्तावित शोध शुरू नहीं हो पा रहा है। जबकि, शोध के लिए अलग-अलग आयु वर्ग और अलग-अलग राज्यों से 100 नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं। नमूनों को माइनस 80 डिग्री तापमान में रखा गया है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग की टीम को इस संबंध में शोध करना है।
एक्सक्लूसिव: इस वजह से प्रभावित हो रहा है कोरोना वायरस से जुड़ा खास शोध, अलग-अलग राज्यों से जुटाए गए हैं नमूने
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जानकारी के मुताबिक, कोरोना वायरस पर दुनिया भर में शोध चल रहा है, मगर वायरस की संरचना और स्वरूप के बारे में अब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। अलग-अलग देशों में वायरस का प्रभाव अलग-अलग रहा है। पूर्वांचल की बात करें, तो वायरस का असर दिल्ली और मुंबई की तुलना में यहां काफी कम रहा है। पूर्वांचल के जिलों में मृत्यु दर भी कम रही है। ऐसे में बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबॉयोलॉजी और डीडीयू की जूलॉजी टीम ने वायरस की संरचना और उसके जीन में बदलाव से होने वाले लक्षणों का पता लगाने के लिए शोध का फैसला लिया था, जो कि किट नहीं मिलने की वजह से प्रभावित हो रहा है।
टीम में शामिल हैं पांच सदस्य
डॉ. अमरेश सिंह माइक्रोलॉजिस्ट बीआरडी, डॉ. विवेक सिंह माइक्रोलॉजिस्ट बीआरडी, अंकुर कुमार डीडीयू यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर, डॉ. सुशील कुमार रिसर्च स्कॉलर डीडीयू और सूरज कुमार टीम में शामिल हैं।
अलग-अलग राज्यों के नमूने इकट्ठा
डॉ. सिंह ने बताया कि अलग-अलग राज्यों के नमूने इकट्ठा किए गए हैं। इनमें दिल्ली, मुंबई, केरल, बंगलूरू जैसे राज्यों के नमूने शामिल हैं। इससे पता लगाने की कोशिश होगी कि आखिर कौन से राज्य का वायरस ज्यादा खतरनाक साबित हुआ और किसका असर कम हुआ।
बीआरडी के माइक्रोबॉयोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि शोध के संबंध में सभी तैयारियां पूरी हो गई हैं। 100 नमूने इकट्ठा हुए हैं, लेकिन जीनोम सीक्वेसिंग के लिए शासन की ओर से किट नहीं मिली है। इससे शोध रुका हुआ है। किट महंगी होने की वजह से देरी हो रही है। जैसे ही किट मिलेगी, शोध शुरू कर दिया जाएगा।