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Exclusive: कोरोना संक्रमितों के लिए जानलेवा बना हैप्पी हाइपोक्सिया, बीआरडी में इसी की वजह से हो रही 90 फीसदी मौतें

Tue, 18 May 2021 01:40 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 18 May 2021 01:40 PM IST
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corona infected people of 90 percent died due to Happy Hypoxia at BRD Medical College Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना की दूसरी लहर में हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना संक्रमितों के लिए जानलेवा बन गया है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल और निजी अस्पतालों में 80 से 90 फीसदी मौतें इसी की वजह से हो रही हैं। इस बीमारी से पीड़ित अस्पताल में लगातार आ भी रहे हैं। इसके मरीजों को बुखार और खांसी की कोई शिकायतें नहीं है। लेकिन अचानक उनकी सांस फूलने लग रही है और ऑक्सीजन लेवल कम हो जाता है। इसकी वजह से उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है और मौत तक हो जा रही है। 


बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कोविड वार्ड के इंचार्ज डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना की जानलेवा स्थिति है। कोविड के ऐसे मरीज जिनमें संक्रमण के मामूली लक्षण या फिर कोई लक्षण नहीं हैं। ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है। युवाओं में 70 से 80 फीसदी से नीचे आ जाने पर भी संक्रमण का पता नहीं चलता है लेकिन शरीर में कार्बन डाईआक्साइड का स्तर बढ़ने से मरीज बेहोशी की हालत में पहुंच जाता है। इस स्थिति में जब तक मरीज अस्पताल पहुंचते हैं, तब तक ऑक्सीजन लेवल गिरकर 50 से नीचे आ जाता है। इसकी वजह से ब्रेन हेमरेज, कार्डियक अरेस्ट या सिर में थक्के जमने से मौत हो जाती है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 80 से 90 फीसदी मौतें हैप्पी हाइपोक्सिया की वजह से ही हुईं हैं। 
corona infected people of 90 percent died due to Happy Hypoxia at BRD Medical College Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
जब लगता ठीक है तभी पड़ती है वेंटिलेटर की जरूरत
डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि हैप्पी हाइपोक्सिया के मरीजों को लगता है वह बिल्कुल ठीक हैं लेकिन अचानक उन्हें वेंटिलेटर की जरूरत पड़ जाती है। ऐसे केस बीआरडी मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में प्रतिदिन आ रहे हैं। इनमें अधिकांश युवा हैं। युवाओं के साथ दिक्कत यह है कि वह लक्षण के आधार पर दवा खा रहे हैं। युवाओं में ऑक्सीजन लेवल 80 से 90 के बीच रहता है तो उन्हें पता नहीं चलता है लेकिन अचानक यह जब 50 सो 60 के बीच पहुंच जाता है तो वेंटिलेटर की नौबत आ जाती है। 
corona infected people of 90 percent died due to Happy Hypoxia at BRD Medical College Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे आए तो हो जाएं अलर्ट
डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि सामान्य व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल 95 से 100 के बीच होता है। संक्रमण होने से ऑक्सीजन का लेवल गिरता है। पर इसका आभास नहीं होता है। शरीर में ऑक्सीजन घटता रहता और कार्बन डाइऑक्साइड का लेवल बढ़ जाता है। इससे फेफड़ों में सूजन आ जाती है ऑक्सीजन रक्त में नहीं मिल पाता है। इससे मस्तिष्क में ऑक्सीजन की कमी से कोशिकाएं मरने लगती हैं। युवा वर्ग को ऑक्सीजन लेवल 70 से नीचे आ जाने पर आभास होता है, पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। 
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डॉ राजकिशोर सिंह - फोटो : अमर उजाला।
क्या है हैप्पी हाइपोक्सिया
डॉ. राजकिशोर सिंह ने बताया कि हैप्पी हाइपोक्सिया कोरोना का नया लक्षण है। इसमें संक्रमित मरीज को बुखार, खांसी या सांस फूलने की समस्या नहीं होती है लेकिन अचानक ऑक्सीजन लेवल गिरने से मरीज की जान खतरे में पड़ जाती है। हाइपोक्सिया किडनी, दिमाग, दिल पर असर डालता है। युवाओं की इम्यूनिटी मजबूत होती है। ऐसे में उन्हें सामान्य लक्षण पता नहीं चलता है। ऐसे स्थिति में युवाओं के ऑक्सीजन लेवल 95 से कम हो तो हाइपोक्सिया के लक्षण हो सकते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऐसे पहचानें हाइपोक्सिया
एक सांस में तीस तक गिनती गिनें। इस दौरान अगर सांस लेने में दिक्कत होती है तो चिकित्सक से संपर्क करें। हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण छह से नौ दिनों के बीच में आते हैं। इस बीच छह मिनट तक लगातार टहला करें। इसके बाद तत्काल ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल चेक करें। अगर 95 से कम है तो डॉ. से संपर्क करें।
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